
राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए फैसला किया है कि उसके कोई भी सदस्य इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेंगे। इस फैसले के बाद मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले ने अधिवक्ताओं की भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित किया है।
बार एसोसिएशन की आम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई अधिवक्ता आरोपियों की ओर से पेश होना चाहता है तो उसे प्रत्येक आरोपी के लिए 5 लाख रुपये बार एसोसिएशन के पास जमा कराने होंगे। एसोसिएशन का कहना है कि इस राशि का उपयोग मामले में अभियोजन पक्ष की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
बार एसोसिएशन ने राम मंदिर से जुड़े पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की मांग की है। हालांकि, इन तीनों के नाम इस मामले की एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं हैं। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो शहरव्यापी विरोध और अयोध्या की घेराबंदी पर विचार किया जाएगा।
बार एसोसिएशन ने तीनों पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। पहले पुलिस से शिकायत की जाएगी और कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का रुख किया जाएगा। इसके अलावा, कथित गबन की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर करने का फैसला लिया गया है।
इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाली नकदी और कीमती सामान की गिनती से जुड़े कार्य में लगे थे। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जांच के तहत पुलिस ने उनके घरों पर भी तलाशी अभियान चलाया है। फिलहाल जांच जारी है और संबंधित आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
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