राम मंदिर दान चोरी: रोज़ 6-8 लाख की हेराफेरी,पार्क में बंटता था 'प्रसाद', अब घेरे में पूर्व ट्रस्टी!

Published : Jul 04, 2026, 11:08 AM IST
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सार

अयोध्या राम मंदिर दान हेराफेरी केस में SIT जांच तेज, रोज़ 6-8 लाख की चोरी का शक, SBI कर्मचारियों पर सवाल, गुप्त मनी ट्रेल और अंदरूनी मिलीभगत की जांच जारी।

अयोध्या: आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या धाम से एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए जाने वाले दान में हुई महा-हेराफेरी की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, घोटाले का आकार देखकर जांचकर्ता भी हैरान हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित लूट थी। अब इस मामले की आंच मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष तक पहुंच चुकी है, जिससे यह पूरी घटना एक हाई-प्रोफाइल क्राइम थ्रिलर में बदल गई है।

16 लाख से 26 लाख का रहस्य: आंकड़ों ने खोला खौफनाक राज

इस महाघोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब दान के आंकड़ों में एक अजीबोगरीब उछाल देखा गया। SIT द्वारा पूछताछ किए गए बैंक अधिकारियों ने जो गवाही दी, वह चौंकाने वाली थी। उन्होंने बताया कि इस बड़ी चोरी का पता चलने से पहले, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों में रोज़ाना औसतन 16 से 18 लाख रुपये का नकद दान जमा होता था। लेकिन, जैसे ही इस हेराफेरी का भंडाफोड़ हुआ और जांच शुरू हुई, यही दान राशि अचानक बढ़कर रोज़ाना 24 से 26 लाख रुपये हो गई। इन आंकड़ों का गणित सीधा और खौफनाक है-जांचकर्ताओं का अनुमान है कि शातिर चोरों की यह मंडली रोज़ाना भक्तों के चढ़ावे से 6 से 8 लाख रुपये साफ कर रही थी।

"भगवान देख रहे हैं..."गहनों की डकैती और वो सनसनीखेज बातचीत

इस घोटाले का सबसे हैरान करने वाला पहलू इसका बेखौफ अंदाज था। मंदिर में चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के गहनों का कभी कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं रखा गया, जिससे उन्हें उड़ाना और भी आसान हो गया। तफ्तीश में सामने आया कि चोरी का पहला सुराग इस साल फरवरी में मिला था। कैश गिनने वाली टीम के एक सदस्य ने जब गिनती के इंचार्ज और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव को टोका कि काउंटर पर खुलेआम पैसे चुराए जा रहे हैं, तो श्रीवास्तव का जवाब रूह कंपा देने वाला था। उसने बेहद ठंडे दिमाग से कहा, "भगवान देख रहे हैं, ऐसा तो नहीं है कि यह तुम्हारे या मेरे घर से जा रहा है।" सुभाष श्रीवास्तव अब उन आठ मुख्य आरोपियों में शामिल है, जिन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

भीखापुर का वो गुप्त पार्क: जहां लगता था 'लूट की रकम' का मेला

SIT की कस्टडी में मौजूद आरोपी अविनाश शुक्ला ने एक और गहरे राज से पर्दा उठाया है। उसने कबूल किया कि दान पेटियों से चुराए गए लाखों रुपये किसी बैंक या तिजोरी में नहीं जाते थे, बल्कि उन्हें हर रोज़ मंदिर के पास ही एक पार्क में ले जाया जाता था। 14 कोसी परिक्रमा रूट पर भीखापुर के पास स्थित इसी सुनसान पार्क में सभी आरोपी इकट्ठा होते थे और चोरी की रकम को आपस में बांटते थे। शुक्रवार को पुलिस की टीम आरोपी को उसी पार्क में क्राइम सीन री-क्रिएट करने के लिए लेकर गई थी।

बैंक और प्राइवेट एजेंसी का 'नेक्सस': रडार पर बड़े अधिकारी

राम मंदिर में नकद दान की गिनती की पूरी ज़िम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की है। इसके लिए 14 लोगों की एक टीम बनाई गई थी, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और 3 ट्रस्ट के सदस्य थे। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर कैश गिनने जैसे बेहद संवेदनशील काम के लिए एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के लोगों को लगा दिया गया था। SIT अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए मूल समझौते में बदलाव क्यों किए गए? अगर किसी को गड़बड़ी का शक था, तो सीनियर अधिकारियों को रिपोर्ट क्यों नहीं की गई? मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या पुलिस अब मनी ट्रेल (Paisa Trail) का पता लगाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी पत्र लिखने जा रही है।

चंपत राय समेत तीन का इस्तीफा: अब प्रॉपर्टी और कमीशन की बारी!

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा भूचाल तब आया जब गंभीर आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। SIT ने शुक्रवार को दूसरी बार इन तीनों से बंद कमरे में कड़ी पूछताछ की। अब जांच की सुई इनकी पर्सनल चल-अचल संपत्ति और आय के स्रोतों पर टिक गई है। SIT ने तीनों पूर्व अधिकारियों से उनकी संपत्तियों के दस्तावेज मांगे हैं। अनिल मिश्रा और गोपाल राव से विशेष रूप से इस बात पर पूछताछ की जा रही है कि पिछले कुछ सालों में उनकी संपत्ति में अचानक इतनी बढ़ोतरी कैसे हुई? इसके साथ ही मंदिर निर्माण और जमीन की खरीद के दौरान कुछ खास लोगों को कमीशन और अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की भी गहनता से जांच की जा रही है। SIT अब ट्रस्ट की सालाना ऑडिट रिपोर्ट का दोबारा ऑडिट कराने की तैयारी में है।

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