Ram Temple Theft: राम मंदिर में 105 बार चोरी! 8 आरोपियों की चार्जशीट पर जयराम रमेश ने उठाए बड़े सवाल

Published : Oct 04, 2026, 03:39 PM IST
modi jairam ramesh

सार

Ram Temple Donation Theft Case: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीएम मोदी की चुप्पी पर निशाना साधते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। रमेश ने पूछा कि 105 घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद एफआईआर में 21 दिन की देरी क्यों हुई।

Ram Mandir Chargesheet: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अभी तक उन लोगों तक नहीं पहुंची है जो चोरों को बचा रहे हैं। रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में उन्होंने जांच में हो रही देरी का जिक्र किया। उन्होंने मोदी सरकार पर इस मामले में नरमी बरतने का आरोप लगाया।

रमेश ने पूछा, "मोदी जी, विपक्ष के नेताओं के खिलाफ ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करने में सरकार जरा भी नहीं हिचकिचाती। लेकिन अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की 105 घटनाएं सीसीटीवी में कैद होने के बाद भी जांच उन लोगों तक क्यों नहीं पहुंची, जिन पर चोरों को बचाने का शक है? व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी तो उन्हीं की थी। 105 चोरियों में से सिर्फ 79.85 लाख रुपये बरामद करके केस बंद करने की इतनी जल्दी क्यों है? चंपत राय और अनिल मिश्रा आरोपी क्यों नहीं हैं, उन्हें गवाह कैसे बना दिया गया?"

उन्होंने आगे कहा, "हमारा सवाल सीधा है। जब 4 जून को चोरी की रकम का वीडियो चंपत राय तक पहुंचा, 5 जून को सीसीटीवी फुटेज चेक किया गया और 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई, तो इस 21 दिन की देरी का पूरा सच देश के सामने क्यों नहीं रखा गया? यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बड़े स्तर की मिलीभगत, लापरवाही या संरक्षण के बिना इतनी सारी घटनाएं कैसे हो सकती हैं? 105 घटनाओं के बावजूद सिर्फ आठ आरोपी कैसे हो सकते हैं? क्या जांच का मकसद सिर्फ चढ़ावा चुराने वाले छोटे चोरों को पकड़ना था, या उन लोगों की जवाबदेही तय करना था जिनके संरक्षण और निगरानी में यह सब चलता रहा?"

जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच की मांग कर रही है। उन्होंने पूछा, "105 घटनाओं के बाद भी अगर हमें यह नहीं पता कि कुल कितनी रकम चोरी हुई, तो जांच खत्म करने की इतनी जल्दी क्यों है? देश जवाब मांग रहा है: क्या मोदी सरकार सिर्फ चढ़ावा चोरों तक पहुंचना चाहती है, या उन सवालों को दबाना चाहती है जो बड़े जिम्मेदार लोगों तक पहुंच सकते हैं? प्रधानमंत्री जी, देशवासियों की आस्था से जुड़े इस मामले पर आपकी चुप्पी कब टूटेगी?"

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "याद रखिए, सत्ता का अहंकार खुद को ही खत्म कर देता है। अब देश जवाब चाहता है: चढ़ावे की चोरी के लिए जवाबदेही कब तय होगी?"

इससे पहले 26 सितंबर को भी जयराम रमेश ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दायर चार्जशीट पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की थी। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और चढ़ावे की चोरी के अलावा कोई और गड़बड़ी नहीं मिली है।

एसआईटी ने 8 आरोपियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट

श्री राम जन्मभूमि दान चोरी मामले में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सबसे अहम सबूत बनकर सामने आई है। स्थानीय अदालत में दायर विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपी अविनाश शुक्ला ने गिनती के दौरान 85 बार दान के पैसे निकाले।

एसआईटी ने इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) शामिल हैं। चार्जशीट में मामले के अन्य आरोपियों की भूमिकाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया है。

अन्य आरोपियों की भूमिका का खुलासा

एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, एक अन्य आरोपी को दो बार चढ़ावे के पैसे निकालते और 68 बार चोरी में मदद करते देखा गया। वहीं, मनीष कुमार यादव 16 बार चोरी में शामिल रहा और 19 बार पैसे निकालने में मदद की। जांच रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि लवकुश मिश्रा ने एक बार चढ़ावे के पैसे निकाले और 52 बार पैसे निकालने में मदद की। अनुकल्प मिश्रा को 56 बार पैसे निकालने में मदद करते देखा गया, जबकि रिटायर्ड बैंक कर्मचारी रमाशंकर मिश्रा को एक बार चढ़ावे के पैसे निकालते देखा गया।

चार्जशीट में आरोपियों के बीच बातचीत के लिंक का भी जिक्र है। इसके लिए मोबाइल चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत बनाया गया है।

ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य बने गवाह

इस मामले में करीब 98 लोगों को गवाह बनाया गया है। इनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल जी शामिल हैं।

चार्जशीट में जिन आठ आरोपियों के नाम हैं, वे अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ ​​टिन्नू हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत के बाद 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में भक्तों द्वारा दान किए गए धन की चोरी, गबन और सुनियोजित हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।

पुलिस ने मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच करने के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की है।

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