
Shivchandra Ram Video: बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) चुनाव के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर चल रही अंदरूनी हलचलों को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और आरजेडी एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शिवचंद्र राम ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी बात रखते हुए शिवचंद्र राम भावुक हो गए। वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने का दावा करते हुए उन्होंने नेतृत्व पर वादाखिलाफी और उपेक्षा के आरोप लगाए। इस दौरान उनकी आंखों से आंसू भी छलक पड़े, जिसकी चर्चा अब पूरे राजनीतिक गलियारे में हो रही है।
RJD से MLC उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद फूट-फूट कर प्रेस कांफ्रेंस में रोने लगे आरजेडी नेता शिवचंद्र राम… #RJD #MlC #Shivchandraram pic.twitter.com/mC4LjU06w1
— Mukesh singh (@Mukesh_Journo) June 8, 2026
शिवचंद्र राम का कहना है कि बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए उनका नाम लंबे समय से संभावित उम्मीदवारों की सूची में चर्चा में था। राजनीतिक हलकों और मीडिया रिपोर्ट्स में भी उनका नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताया जा रहा था। इसी वजह से उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें विधान परिषद भेजेगी। लेकिन नामांकन की अंतिम प्रक्रिया से ठीक पहले उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया। यही फैसला उनके लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से आहत किया है और इसी कारण उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
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पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवचंद्र राम ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के निर्देशों का पालन किया और संगठन को मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम किया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि जब अंतिम समय में उनके स्थान पर किसी अन्य नेता को मौका दिया गया, तो उन्हें यह फैसला बेहद अन्यायपूर्ण लगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनका भावुक होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे पार्टी के फैसले से गहराई से आहत हैं।
पूर्व मंत्री ने सीधे तौर पर पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब यह किसी से छिपा नहीं है कि पार्टी के भीतर किसकी बात सुनी जा रही है और किसकी अनदेखी की जा रही है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में कई बातें स्वतः स्पष्ट हो जाएंगी।
शिवचंद्र राम लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति का हिस्सा रहे हैं। वे पार्टी के दलित और वंचित वर्गों के बीच प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का राजनीतिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक संरचना के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
बिहार में इस वर्ष राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। ऐसे समय में किसी बड़े नेता की नाराजगी विपक्षी दलों के लिए अवसर और पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती दोनों बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी इस असंतोष को समय रहते संभाल नहीं पाती, तो इसका असर भविष्य की चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवचंद्र राम आगे कौन सा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं और पार्टी नेतृत्व उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई पहल करता है या नहीं।
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