राम मंदिर के CEO इंटरव्यू में उठे ऐसे सवाल जिन्होंने सबको चौंका दिया! 'जनेऊ', खान-पान और 'कट्टर हिंदू' होने के पैमाने पर परखे गए 16 दिग्गज। जानिए आस्था और प्रशासन के बीच कैसे चुना जाएगा पहला CEO?
अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर परिसर के संचालन और भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं को संभालने के लिए अपने पहले फुल-टाइम चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह कदम मंदिर के रोजमर्रा के मैनेजमेंट, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विस्तार को एक नया प्रशासनिक ढांचा देने के लिए उठाया गया है। हालाँकि, इस इंटरव्यू प्रक्रिया की सबसे बड़ी चर्चा उन अनोखे और सख्त सवालों को लेकर हो रही है, जो उम्मीदवारों के सामने रखे गए।
40 मिनट का कड़ा इंटरव्यू: प्रशासनिक दक्षता के साथ परखी गई निजी आस्था
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित पद के लिए देश के शीर्ष प्रशासनिक और सैन्य अनुभव रखने वाले कुल 16 दिग्गजों का इंटरव्यू लिया गया। प्रत्येक उम्मीदवार का इंटरव्यू लगभग 40 से 50 मिनट तक चला। जहाँ एक तरफ उम्मीदवारों की लीडरशिप स्किल्स, विज़न और मैनेजमेंट क्षमताओं को परखा गया, वहीं दूसरी तरफ सवाल सिर्फ कागजी योग्यता तक सीमित नहीं रहे। उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक मान्यताओं, जीवनशैली और व्यक्तिगत आदतों पर तीखे और सीधे सवाल पूछे गए, जिसने इस चयन प्रक्रिया को देश के किसी भी अन्य प्रशासनिक पद से बिल्कुल अलग बना दिया।
क्या आप 'कट्टर हिंदू' हैं? 'जनेऊ', खान-पान और शराब पर सवालों की बौछार
इस इंटरव्यू राउंड की सबसे हैरान करने वाली बात वे सवाल रहे जो उम्मीदवारों की आस्था और धार्मिक पहचान से जुड़े थे। सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों से स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या वे भगवान राम में अटूट विश्वास रखते हैं और हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों का कितना पालन करते हैं? उनसे पूछा गया कि क्या वे 'जनेऊ' (पवित्र धागा) धारण करते हैं, क्या वे चोटी रखते हैं, और उनका खान-पान कैसा है-यानी वे पूर्ण शाकाहारी हैं या मांसाहारी। इसके अलावा, शराब पीने की आदतों और इस बात पर भी जोर दिया गया कि उम्मीदवार खुद को एक "कट्टर हिंदू" मानता है या सामान्य हिंदू आस्था में विश्वास रखता है।
पूर्व IAS, IPS और सैन्य अधिकारी रेस में शामिल: जल्द होगा अंतिम फैसला
इस उच्च स्तरीय चयन प्रक्रिया में देश की सुरक्षा और प्रशासन का लंबा अनुभव रखने वाले दिग्गजों ने हिस्सा लिया। उम्मीदवारों में तीन पूर्व IAS ऑफिसर, एक पूर्व IPS ऑफिसर और चार पूर्व मिलिट्री ऑफिसर शामिल थे। राम मंदिर ट्रस्ट अब सभी 16 उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव और इंटरव्यू के दौरान दिए गए उत्तरों का अंतिम मूल्यांकन कर रहा है। जल्द ही ट्रस्ट की ओर से पहले फुल-टाइम CEO के नाम का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा, जो अयोध्या राम मंदिर के भावी प्रशासनिक स्वरूप को दिशा देगा।
आखिर CEO की जिम्मेदारी इतनी बड़ी क्यों है?
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए यह नियुक्ति इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि CEO को अयोध्या में राम मंदिर परिसर के प्रशासनिक और ऑपरेशनल कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभालने होंगे। राम मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, सुविधाओं, विभिन्न निर्माण परियोजनाओं और रोजमर्रा के प्रबंधन के बीच एक मजबूत प्रशासनिक ढांचे की जरूरत है। ऐसे में CEO का पद केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के भविष्य के प्रबंधन से जुड़ा महत्वपूर्ण पद माना जा रहा है।
अब किस नाम पर लगेगी मुहर?
इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट अंतिम चयन कर सकता है। फिलहाल किसी एक उम्मीदवार का नाम आधिकारिक तौर पर CEO पद के लिए घोषित नहीं किया गया है। राम मंदिर के निर्माण और विस्तार के साथ अयोध्या में बढ़ती धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आने वाले समय में CEO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि राम मंदिर ट्रस्ट का पहला फुल-टाइम CEO कौन बनेगा, बल्कि यह भी है कि ट्रस्ट किस तरह के प्रशासनिक नेतृत्व को अयोध्या के इस विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक परिसर की जिम्मेदारी सौंपता है।


