
नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में चल रहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के तनाव के बीच भारत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने फिलहाल टैरिफ और प्रतिबंधों का दबाव कुछ कम किया है, जिससे भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की राजनीति में विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि अब भारत को मॉस्को से तेल खरीदने के लिए वाशिंगटन की अनुमति लेनी पड़ सकती है, जिस पर संसद और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के कारण तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे माहौल में रूस भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल बेचने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है। जैसे ही अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत दी, उसी समय खबर आई कि रूस ने भारत के करीब समुद्र में बड़ी मात्रा में तेल भेज दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारत की पहुंच के भीतर समुद्र में 1.5 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल तैयार रखा है। शिप ट्रैकिंग डेटा के आधार पर तैयार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि यह तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौजूद एक दर्जन से अधिक टैंकरों में रखा गया है। इनमें से कई कार्गो अभी तक बिके नहीं हैं या फिर यह तय नहीं हुआ है कि इनका तेल किस भारतीय बंदरगाह पर उतारा जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार ये टैंकर एक हफ्ते या उससे भी कम समय में भारत पहुंच सकते हैं। इससे भारत को ऊर्जा संकट के दौर में अतिरिक्त सप्लाई मिल सकती है। इसके अलावा करीब 70 लाख बैरल रूसी यूराल्स तेल लेकर 8 और जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं। ये जहाज भी लगभग एक सप्ताह के भीतर भारत पहुंच सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ और रूसी तेल टैंकर भूमध्यसागर और स्वेज नहर के रास्ते पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के जरिए आने वाली खेप एक महीने से कम समय में भारत पहुंच सकती है, जिससे भारत को लगातार तेल सप्लाई मिलने की संभावना बनी हुई है।
फरवरी 2026 में रूस भारत के लिए सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना रहा। आंकड़ों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां हर दिन लगभग 1 से 1.7 मिलियन बैरल रूसी क्रूड ऑयल आयात कर रही थीं। इसका मतलब है कि फरवरी महीने में भारत के कुल तेल आयात का लगभग 25% से 30% हिस्सा रूस से आया। कुल मिलाकर यह मात्रा लगभग 28 से 48 मिलियन बैरल रूसी तेल के बराबर है। आसान शब्दों में समझें तो भारत हर दिन करीब 10 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा है। ये आंकड़े इस धारणा को गलत साबित करते हैं कि भारत के ऊर्जा से जुड़े फैसले किसी दूसरे देश द्वारा तय किए जाते हैं।
अगर भारत को वास्तव में रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की अनुमति लेनी पड़ती, तो इस पैमाने पर आयात जारी नहीं रह सकता था। दरअसल भारत की ऊर्जा नीति एक सरल सिद्धांत पर आधारित है- 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना। भारत सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले देश के हित और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर लिए जाते हैं।
भारत अपनी कुल जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसी स्थिति में सरकार को लगातार कई अहम पहलुओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है, जैसे- कच्चे तेल की कीमत, सप्लाई की स्थिरता, जियोपॉलिटिकल रिस्क, घरेलू महंगाई आदि। सस्ते दाम पर खरीदा गया हर बैरल तेल सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली उत्पादन और आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डालता है।
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने अपनी एनर्जी बास्केट को डायवर्सिफाइड बनाया। उस समय रूसी कच्चा तेल भारत के लिए आकर्षक विकल्प बन गया क्योंकि यह प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध था। भारतीय रिफाइनरियों ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया और सरकार ने भी ऐसी रणनीति का समर्थन किया जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक तेल कीमतों के झटकों से बचाया जा सके।
भारत अमेरिका के साथ भी ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करता है, ठीक उसी तरह जैसे वह रूस, खाड़ी देशों और अन्य सप्लायर देशों के साथ करता है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच कूटनीति में अक्सर ट्रेड नेगोशिएशन, टैरिफ और राजनीतिक संदेश शामिल होते हैं। हालांकि इन बातचीतों को 'इजाजत' के रूप में समझना सही नहीं है।
नई दिल्ली ने कई बार स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा खरीद बाजार की स्थिति और राष्ट्रीय हित के आधार पर तय होती है। दिलचस्प बात यह है कि वॉशिंगटन द्वारा रूस से तेल खरीदने पर दंडात्मक टैरिफ की घोषणा के बाद भी भारत ने आयात बंद नहीं किया। इसके बजाय भारत ने अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए ऊर्जा सप्लाई के कई स्रोत विकसित करने की रणनीति जारी रखी।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।