
एडमोंटन: कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद हराम करने वाले एक बेहद खतरनाक और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पंजाब के रहने वाले 22 वर्षीय सफलदीप सिंह को एडमोंटन पुलिस सर्विस (EPS) ने एक बेहद सीक्रेट ऑपरेशन के तहत दबोच लिया है। सफलदीप पर न सिर्फ जबरन वसूली (Extortion) बल्कि एक हाई-प्रोफाइल 'हत्या की साजिश' (Murder Conspiracy) रचने का भी संगीन आरोप है, जिसके लिए उसके खिलाफ पूरे कनाडा में वारंट जारी था। 23 जून को हुई इस गिरफ्तारी को कनाडाई अंडरवर्ल्ड के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अधिकारियों ने उसके पास से चोरी की संपत्तियां, अवैध हथियार और ड्रग्स से जुड़े कई गुप्त सबूत बरामद किए हैं, जिसके बाद उसे तुरंत ओंटारियो की जेल में शिफ्ट कर दिया गया है।
एडमोंटन पुलिस सर्विस (EPS) के अनुसार, 22 वर्षीय सफलदीप सिंह को 23 जून को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ पहले से ही हत्या की साज़िश और जबरन वसूली जैसे मामलों में कनाडा-व्यापी वारंट जारी था। गिरफ्तारी के बाद उस पर अपराध से अर्जित संपत्ति की तस्करी, चोरी की संपत्ति रखने और बिना लाइसेंस हथियार रखने जैसे अतिरिक्त आरोप भी लगाए गए। अब उसे ओंटारियो भेजा गया है, जहां उसके खिलाफ दर्ज मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
आखिर क्या है यह "फॉर ब्रदर्स" (For Brothers) गैंग, जिसने कनाडा और अमेरिका में रहने वाले संपन्न इंडो-कैनेडियन व्यवसायियों की रातों की नींद उड़ा रखी है? खुफिया जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह कोई साधारण स्थानीय गिरोह नहीं है, बल्कि एक अत्यंत संगठित और आधुनिक हथियारों से लैस सीमा-पार (Cross-Border) आपराधिक नेटवर्क है। इसका दायरा ग्रेटर टोरंटो एरिया (GTA) से लेकर ब्रैम्पटन, मिसिसागा, कैलेडॉन, ब्रिटिश कोलंबिया और अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया तक फैला हुआ है। यह नेटवर्क अमीर भारतीय प्रवासियों और स्थानीय कारोबारियों को चिन्हित करता है, उन्हें इंटरनेशनल नंबरों से धमकी भरे फोन करता है और पैसे न देने पर उनके घरों और दफ्तरों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाता है।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और दहला देने वाला मोड़ तब आया, जब अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI और कनाडाई पील रीजनल पुलिस (PRP) की संयुक्त 'एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स' ने इस गैंग की कुंडली खंगाली। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने सिर्फ कुछ हफ्तों के भीतर डराने-धमकाने और आतंक फैलाने के लिए 24 से ज्यादा हिंसक वारदातों को अंजाम दिया। सबसे खौफनाक बात यह है कि इन हमलों के दौरान कुल 324 राउंड गोलियां चलाई गईं और कई जगहों पर पेट्रोल बम से आगजनी की गई। हाल ही में हुए एक बड़े क्रैकडाउन में इसी नेटवर्क से जुड़े भारतीय मूल के 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर 106 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सफलदीप सिंह इसी खूनी चेन की एक अहम और आखिरी कड़ी माना जा रहा है।
कनाडा में छिड़ी यह गैंगवार अब सिर्फ जबरन वसूली तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार भारत की तिहाड़ जेल और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। हाल ही में मशहूर पंजाबी सिंगर एपी ढिल्लों के कनाडाई घर पर हुए हमले के बाद गिरफ्तार हुए अभिजीत सिंह किंगरा के सनसनीखेज दावों ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया है। किंगरा ने दावा किया है कि वह पुलिस की गिरफ्त में आते ही बिश्नोई गैंग के सीधे निशाने पर आ गया है, क्योंकि गैंग को शक है कि वह पुलिस का मुखबिर (Informer) बन चुका है। कनाडाई जेलों के भीतर और बाहर भारतीय मूल के गैंगस्टर्स के बीच वर्चस्व की एक मूक जंग (Silent War) छिड़ चुकी है।
EPS इन्वेस्टिगेशन ब्रांच के स्टाफ सार्जेंट एरिक स्टीवर्ट ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम कुछ समय से कनाडा के अलग-अलग प्रांतों में फैले इस जबरन वसूली नेटवर्क की गहरी जांच कर रहे हैं। हमने अलग-अलग राज्यों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक बेहद कड़ा और गुप्त प्लान तैयार किया है।" सफलदीप की गिरफ्तारी भले ही एक बड़ी जीत हो, लेकिन पुलिस मानती है कि इस खूनी खेल के असली मास्टरमाइंड और 'आका' अभी भी सात समंदर पार बैठकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सफलदीप के मुंह खोलते ही इस अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड के कौन-से बड़े चेहरे बेनकाब होते हैं।
हाल के वर्षों में कनाडा में इंडो-कैनेडियन समुदाय के कारोबारियों को निशाना बनाकर धमकी, रंगदारी और हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क सीमाओं के पार काम करते हैं और आधुनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर अपने अपराधों को अंजाम देते हैं। सफलदीप सिंह की गिरफ्तारी को इसी व्यापक अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत में पेश होने वाले सबूत इस कथित नेटवर्क की कितनी नई परतें उजागर करते हैं और क्या इससे संगठित अपराध के इस पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकेगा।
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