
तेहरान/वाशिंगटन: वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर और संवेदनशील नस—होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—इस समय एक भयंकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और सैन्य अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। फारस की खाड़ी से निकलने की जद्दोजहद में जुटे कम से कम आठ विशालकाय जहाजों और तेल टैंकरों के अचानक यू-टर्न लेने से समुद्री गलियारों में हड़कंप मच गया है। ट्रैकिंग डेटा के सनसनीखेज खुलासे बताते हैं कि मुसंदम प्रायद्वीप के संकरे चोकपॉइंट तक पहुँचने के बाद जहाजों ने खौफ के मारे अपने रास्ते बदल लिए। समुद्र की लहरों पर मंडराते इस सस्पेंस ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं, क्योंकि यहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है।
होर्मुज़ के इस संकरे और खतरनाक रास्ते से गुजरने के लिए अब जहाज कप्तानों को रोंगटे खड़े कर देने वाले तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। पकड़े जाने और मिसाइल हमलों के डर से कई कमर्शियल जहाजों, तेल टैंकरों और बल्क कैरियर्स ने अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को पूरी तरह बंद कर दिया है। समंदर के नक्शे से गायब होकर 'डार्क मोड' में सफर कर रहे इन जहाजों को अमेरिकी नौसैनिक बल गुप्त रूप से गाइड कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ कुछ जहाज डरकर यू-टर्न ले रहे हैं, वहीं कुछ जहाजों ने जानबूझकर ईरान के तटीय इलाके के करीब से गुजरना चुना है। क्या यह ईरान के साथ किसी गुप्त समझौते का हिस्सा है या मजबूरी, यह रहस्य अभी गहराया हुआ है।
इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के एक संयुक्त वीटो सरीखे बयान ने जलडमरूमध्य में बारूद की गंध और बढ़ा दी है। फ्रांस ने इस रणनीतिक जलमार्ग से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अपने 'माइन काउंटरमेज़र' युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। दोनों देशों ने खुलेआम घोषणा की है कि वे ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन और फ्रांस की यह जोड़ी यहाँ एक बहुत बड़े 'बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन' को उतारने की तैयारी में है। पश्चिमी देशों का तर्क है कि होर्मुज़ वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और वे इसे किसी भी कीमत पर ईरान के रहमों-करम पर नहीं छोड़ सकते।
पश्चिमी देशों की इस सैन्य घेराबंदी पर ईरान ने बेहद आक्रामक और तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस को खुली चुनौती दी है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य विदेशी ताकतों के सैन्य प्रदर्शन का "अखाड़ा" नहीं है। ग़रीबाबादी ने दहाड़ते हुए कहा कि इस जलमार्ग की सुरक्षा का असली और एकमात्र गारंटर सिर्फ ईरान और ओमान हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि यदि बाहरी दखलअंदाजी बंद नहीं हुई, तो वह पूरे शिपिंग रूट को अपने कब्जे में लेकर मनमुताबिक टोल टैक्स वसूलना शुरू कर देगा।
28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत होने से पहले तक इस जलडमरूमध्य से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था। अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी को रोकने और इस रूट को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई अस्थायी समझौते हुए, जिसमें कुछ समय के लिए टैक्स को रोका गया था। लेकिन अब वे तमाम वादे और समझौते कागजी नजर आ रहे हैं। टोल टैक्स के भविष्य और सुरक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण पूरी दुनिया के बाजार सहमे हुए हैं। अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण जहाजों के यू-टर्न लेने का यह सिलसिला नहीं थमा, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जो किसी बड़े आर्थिक संकट का सबब बन सकता है।
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