इस्लाम का ‘दुश्मन’, कानून का भगोड़ा! 31 साल तक सलीम वास्तिक ने कैसे खेला धोखे का खेल?

Published : Apr 26, 2026, 04:07 PM IST
Salim Vastik Alias Ex Muslim Salim Khan Arrested After 31 Years in Delhi Child Murder Case

सार

Salim Vastik Arrest: 1 साल से फरार सलीम वास्तिक उर्फ एक्स मुस्लिम उर्फ सलीम खान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाने के बाद उसने फर्जी मौत दिखाकर नई पहचान बना ली थी।

गाजियाबाद के लोनी से सामने आई एक गिरफ्तारी ने 31 साल पुराने उस अपराध की परतें फिर खोल दी हैं, जिसने कभी दिल्ली पुलिस को हिला दिया था। एक मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाला आरोपी सलीम वास्तिक उर्फ एक्स मुस्लिम उर्फ सलीम खान आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।

दिल्ली पुलिस की फाइलों में जिसे मृत मान लिया गया था, वह असल में नई पहचान बनाकर वर्षों से खुली हवा में घूम रहा था। नाम बदला, चेहरा बदला, ठिकाना बदला और यहां तक कि अपनी मौत की कहानी भी खुद लिख दी। लेकिन एक हमला, कुछ वायरल तस्वीरें और गांव वालों की सूचना ने उसके 31 साल पुराने राज को उजागर कर दिया।

कौन है सलीम वास्तिक?

सलीम वास्तिक का असली नाम सलीम खान है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब 31 साल पहले उसने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में एक व्यापारी के बेटे का अपहरण किया था। अपहरण के बाद परिवार से फिरौती मांगी गई। जब रकम नहीं मिली, तो आरोपी ने मासूम बच्चे की हत्या कर दी। इस वारदात ने उस समय दिल्ली में सनसनी फैला दी थी। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद सलीम और उसके साथी को गिरफ्तार किया। अदालत ने 1997 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।

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जमानत मिली और फिर गायब हो गया

साल 2000 में सलीम ने हाई कोर्ट से जमानत हासिल कर ली। जेल से बाहर आते ही वह फरार हो गया। पुलिस को लगा था कि वह ज्यादा दिन छिप नहीं पाएगा, लेकिन उसने अपनी पूरी पहचान ही बदल डाली। दिल्ली छोड़कर वह गाजियाबाद के लोनी पहुंचा और वहीं बस गया। पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखते हुए वह जरूरत पड़ने पर मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर जैसे इलाकों में ठिकाना बदलता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसने किसी माध्यम से दिल्ली पुलिस तक यह खबर पहुंचा दी कि उसकी मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, कथित तौर पर उसने नकली दस्तावेज भी पुलिस तक पहुंचाए, जिससे मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

‘एक्स मुस्लिम’ बनाकर बनाई नई पहचान

सलीम ने सिर्फ नाम नहीं बदला, बल्कि एक नई सार्वजनिक पहचान भी गढ़ ली। उसने खुद को ‘एक्स मुस्लिम’ बताना शुरू किया और यूट्यूब पर इस्लाम की कुरीतियों और धार्मिक कट्टरता पर वीडियो बनाने लगा। उसके वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इस वजह से वह कई कट्टरपंथी संगठनों, कुछ मौलवियों और पाकिस्तान में बैठे अराजक तत्वों के निशाने पर आ गया। बताया जाता है कि इसी वजह से 27 फरवरी को उस पर जानलेवा हमला हुआ। अमरोहा के रहने वाले दो भाइयों ने कथित तौर पर पाकिस्तान आधारित तत्वों के इशारे पर उसके दफ्तर में घुसकर उसका गला रेतने की कोशिश की। हालांकि वह इस हमले में बच गया। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया।

हमला बना गिरफ्तारी की वजह

यही हमला आखिरकार सलीम की गिरफ्तारी का कारण बना। हमले के बाद उसकी कई तस्वीरें मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। दिल्ली पुलिस ने इन तस्वीरों का मिलान अपने पुराने रिकॉर्ड से किया। शक गहराया और फिर पहचान की पुष्टि की गई। इसी बीच सलीम ने शामली में अपना पुश्तैनी मकान भी बेच दिया। इससे गांव वालों को पता चला कि जिसे मृत समझा जा रहा था, वह जिंदा है। गांव से मिली सूचना ने पुलिस को और मजबूत आधार दिया। पुलिस ने लगभग 15 दिनों तक उस पर निगरानी रखी और आखिरकार दो दिन पहले उसे गिरफ्तार कर लिया।

मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट, फिर भी नहीं बच पाया

जानकारी के अनुसार, सलीम मार्शल आर्ट में प्रशिक्षित है और ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुका है। उसने शाओलिन कुंग फू भी सीखा था। दिल्ली के दरियागंज स्थित रामजस स्कूल में वह लंबे समय तक मार्शल आर्ट इंस्ट्रक्टर के रूप में काम कर चुका है। बाद में उसने मुस्तफाबाद इलाके से जैकेट सप्लाई का कारोबार भी शुरू किया। हालांकि, जब उस पर जानलेवा हमला हुआ, तब उसका पूरा मार्शल आर्ट अनुभव किसी काम नहीं आया। हमलावरों ने अचानक हमला किया और वह मुश्किल से अपनी जान बचा सका।

पुलिस के लिए सबक, समाज के लिए सवाल

यह मामला सिर्फ एक फरार अपराधी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सिस्टम की कई कमजोरियों को भी उजागर करता है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसे उम्रकैद की सजा मिली थी, वह जमानत पर बाहर आया, अपनी मौत की फर्जी कहानी गढ़ी और तीन दशक तक पुलिस की नजरों से बचा रहा।

यह सवाल भी उठता है कि आखिर कैसे एक सजायाफ्ता अपराधी ने नई पहचान के साथ इतना लंबा समय गुजार लिया और सिस्टम को भनक तक नहीं लगी। अब दिल्ली पुलिस उसके पुराने नेटवर्क, फरारी के दौरान मदद करने वालों और फर्जी दस्तावेजों की जांच में जुटी है। 31 साल बाद हुई यह गिरफ्तारी सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि कई नए सवालों की शुरुआत भी है।

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