हूती हमलों से डरा सऊदी अरब अब क्या करेगा? ट्रंप की 'ना' के बाद बचे सिर्फ 2 रास्ते

Published : Sep 16, 2026, 01:50 PM IST

हूती विद्रोहियों के सऊदी सेना के खिलाफ हमलों ने मिडिल-ईस्ट की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी बीच, सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद मांगी लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सीधे सैन्य हमले में मदद देने से इनकार कर दिया। ट्रंप की 'ना' के बाद अब उसके पास सीमित विकल्प बचे हैं।

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हूती विद्रोहियों ने कई दिशाओं से बनाया दबाव
  • सिर्फ दो सप्ताह से कुछ अधिक समय में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर पूर्व, दक्षिण और उत्तर की ओर से हमले किए हैं।
  • अगस्त के आखिर में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हमला हुआ। इस घटना में दो नाविकों की मौत हो गई।
  • इसके बाद पिछले सप्ताह हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों से मोखा बंदरगाह शहर और लाल सागर में स्थित एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इससे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली सऊदी शिपमेंट को रोकने की उनकी क्षमता बढ़ने की बात कही जा रही है।
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सऊदी अरब के पास अब सीमित विकल्प
  • चैथम हाउस में मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ नील क्विलियम ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि सऊदी अरब कई वर्षों से यमन संघर्ष से आगे बढ़कर आर्थिक बदलाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देने की कोशिश कर रहा है।
  • उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों की हालिया बढ़त से रियाद पर जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लेकिन उसके सामने मौजूद हर विकल्प की बड़ी कीमत हो सकती है और उसके नतीजे भी अनिश्चित रह सकते हैं।
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सैन्य कार्रवाई बढाने का विकल्प
  • संघर्ष पर नजर रखने वाले संगठन ACLED के मध्य पूर्व रिसर्च मैनेजर शेरवान हिंदरीन अली के मुताबिक, सऊदी अरब अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है और हूती विद्रोहियों को पीछे धकेलने की कोशिश कर सकता है।
  • हालांकि, उनके अनुसार ऐसा करने से संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। साथ ही, सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों के हमले भी और तेज हो सकते हैं।
  • उनके मुताबिक, सऊदी अरब पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुका है, लेकिन अब हूती विद्रोहियों के हथियार पहले की तुलना में काफी आधुनिक हो गए हैं।
  • इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण सऊदी अरब के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता भी कम हो सकती है।
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कूटनीतिक समाधान का विकल्प
  • सऊदी अरब हूती विद्रोहियों या तेहरान में उनके समर्थकों के साथ बातचीत के जरिए कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश भी कर सकता है।
  • हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी नेतृत्व वाली नाकेबंदी हटाने की मांग की है। इससे उन्हें लंबे समय में और मजबूत होने का मौका मिल सकता है।
  • दूसरी ओर, ईरान की क्षेत्र में स्थिरता लाने में रुचि तब तक सीमित रहने की बात कही जा रही है, जब तक उसे अमेरिका की ओर से बड़ी रियायतें नहीं मिलतीं।
  • ऐसे में सऊदी अरब के सामने एक जटिल स्थिति बनी हुई है। उसे अपनी सुरक्षा और तेल निर्यात मार्गों को सुरक्षित रखना है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई बढ़ाने से पैदा होने वाले आर्थिक और क्षेत्रीय जोखिमों को भी ध्यान में रखना होगा।
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यमन युद्ध में सऊदी अरब का पुराना अनुभव
  • सऊदी अरब ने 2015 से कई वर्षों तक हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। हालांकि, जमीन पर उसके सहयोगी बलों को बहुत कम सफलता मिली।
  • इस संघर्ष में अनुमानित 150,000 लोगों की मौत हुई और 2022 में युद्धविराम होने से पहले यमन कई बार अकाल के कगार पर पहुंच गया था।

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