
दुनिया की राजनीति में एक बार फिर ऐसा मोड़ आया है, जिसका असर सीधे आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब Strait of Hormuz को लेकर तनाव बढ़ गया है। यह सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ट्रेड और तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग UNCLOS के नियमों के तहत आता है, जहां सभी देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने का अधिकार होता है। अगर यहां किसी तरह का टैक्स या रोक लगती है, तो यह सीधे अंतरराष्ट्रीय कानून को चुनौती मानी जाएगी।
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सिंगापुर के विदेश मंत्री ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर कोई देश अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को कंट्रोल कर टैक्स लगाने लगे, तो यह एक खतरनाक ट्रेंड बन सकता है। ईरान का रुख यही संकेत देता है कि वह होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जिससे बाकी देशों में चिंता बढ़ गई है।
अगर होर्मुज पर ऐसा कदम उठता है, तो इसका असर दूसरे अहम समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है:
अगर इन जगहों पर भी टैक्स या रोक लगने लगी, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
Suez Canal पर पहले से टोल लिया जाता है, लेकिन यह एक मानव निर्मित नहर है। इसलिए यहां टोल लेना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सही माना जाता है। लेकिन होर्मुज जैसे प्राकृतिक जलमार्ग पर ऐसा करना विवाद पैदा कर सकता है।
भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।
भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक रास्तों पर तेजी से काम करना होगा, जैसे:
इसके अलावा भारतीय नौसेना की भूमिका भी इस क्षेत्र में और अहम हो सकती है।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस वार्ता का मकसद युद्धविराम को स्थायी बनाना था, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज को लेकर दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े रहे। जेडी वेंस ने कहा कि ईरान उनकी शर्तें मानने को तैयार नहीं था, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। अगर होर्मुज को लेकर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की चीजों पर भी दिख सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत का कोई नया रास्ता निकालते हैं या यह विवाद और गहराता है।
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