Iran-US Talks: ईरान और अमेरिका के बीच 21 घंटे चली शांति वार्ता बेनतीजा रही। ईरानी स्पीकर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका भरोसा जीतने में नाकाम रहा। न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर मतभेद बरकरार।

दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच बातचीत हुई, उम्मीद थी कि तनाव कम होगा, लेकिन नतीजा उल्टा निकला। लंबी वार्ता के बाद भी न तो भरोसा बना और न ही कोई ठोस फैसला हो पाया। ईरान ने साफ कह दिया है कि अमेरिका अभी भी भरोसे के लायक नहीं है।

क्या बोले Mohammad Bagher Ghalibaf?

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बातचीत के बाद साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान ने पूरी ईमानदारी और अच्छी नीयत के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन पुराने अनुभवों की वजह से भरोसा बन नहीं पाया। गालिबफ ने कहा कि पिछले युद्धों के अनुभव ने ईरान को सतर्क बना दिया है और इसलिए दूसरी तरफ पर भरोसा करना आसान नहीं है।

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21 घंटे चली बातचीत, फिर भी नहीं निकला हल

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यह अहम बैठक हुई। करीब 21 घंटे तक चली इस बातचीत में दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े रहे। खासकर ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बड़ा मतभेद देखने को मिला। यही वजह रही कि बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

सीजफायर के बाद पहली बड़ी बातचीत

यह वार्ता हाल ही में हुए संघर्ष और सीजफायर के बाद पहली अहम कोशिश थी। हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गालिबफ ने कहा कि अब अमेरिका के सामने साफ विकल्प है, या तो वह ईरान का भरोसा जीतने की कोशिश करे, या फिर हालात ऐसे ही बने रहें।

डिप्लोमेसी और दबाव दोनों साथ-साथ

ईरानी स्पीकर ने इस बातचीत को एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, ईरान सिर्फ बातचीत पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपने सैन्य और रक्षा तंत्र को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए ईरान हर स्तर पर काम कर रहा है, चाहे वह डिप्लोमेसी हो या मिलिट्री तैयारी।

पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ

पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। गालिबफ ने पाकिस्तान को दोस्ताना और भाईचारा निभाने वाला देश बताया। पाकिस्तान की मदद से ही दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू हो पाया, जिसमें हमलों पर रोक और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल था। यह स्ट्रेट दुनिया के लिए एक बेहद अहम शिपिंग रूट माना जाता है।

तनाव अभी भी बरकरार

सीजफायर के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है और यह साफ है कि मतभेद अभी भी गहरे हैं। गालिबफ ने बातचीत को “इंटेंस” बताते हुए ईरानी टीम और जनता की तारीफ की, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि बिना भरोसे के आगे बढ़ना मुश्किल है।

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