Middle East conflict : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की अहम बातचीत ने नई हलचल पैदा कर दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित समझौते को लेकर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं।

US Israel Iran Tension: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हर नई बातचीत दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और परमाणु संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमले के बाद हालात तेजी से बदले। ईरान की जवाबी कार्रवाई और हॉर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही रोकने के फैसले ने पूरी दुनिया को आर्थिक संकट की आशंका में डाल दिया। अब इस तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नया बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई अहम बातचीत

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को जानकारी दी कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हॉर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संभावित अंतिम समझौते को लेकर विस्तार से बातचीत की है। नेतन्याहू ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम समझौते का मुख्य उद्देश्य परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म करना होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों को नष्ट करना और संवर्धित परमाणु सामग्री को उसके क्षेत्र से बाहर हटाना जरूरी होगा।

यह भी पढ़ें: क्या ईरान मान गया अमेरिका की शर्तें? मार्को रुबियो के बयान ने बढ़ाई हलचल

ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल का सख्त रुख

नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि अमेरिका ने हर परिस्थिति में इजरायल की सुरक्षा का समर्थन किया है। उन्होंने ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’ का जिक्र करते हुए कहा कि इन अभियानों में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने मिलकर ईरानी खतरे का सामना किया। इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार की नीति स्पष्ट है और ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

हॉर्मुज स्ट्रेट बना दुनिया की सबसे बड़ी चिंता

ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही रोकने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिली। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज पूरी तरह खुलता है और कोई समझौता होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है। यही वजह है कि दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे मामले में पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देश मध्यस्थता की कोशिशों में लगे हुए हैं। लगातार बातचीत का दौर जारी है, लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जबकि तेहरान इसे एकतरफा दबाव की रणनीति मान रहा है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह अमेरिकी शर्तों के आगे झुकने के मूड में नहीं है।

क्या समझौते के करीब पहुंच चुका है मिडिल ईस्ट?

डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अभी भी कई बड़े मतभेद बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन मिडिल ईस्ट के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। अगर बातचीत सफल होती है तो क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर वार्ता विफल रही तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया की नजर अब अगले फैसले पर

मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब सिर्फ तीन देशों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक तेल कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले दिनों में ईरान को लेकर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

यह भी पढ़ें: व्लादिमीर पुतिन का ‘महाविनाशक’ हमला! ओरेशनिक मिसाइल ने कीव में मचाई तबाही