Supreme Court CJP Protest: दिल्ली में प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो, इंटरनेट, ट्रैफिक, बैरिकेडिंग और गैर-कानूनी हिरासत को लेकर निर्देश दिए। अधिकारियों से अनुपालन पर जवाब मांगा गया है।
Supreme Court CJP Protest: दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को अहम सुनवाई की। अदालत ने कहा कि राजधानी में लोगों की आवाजाही कानून के मुताबिक सुचारू रहनी चाहिए। मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं को सामान्य रखने, बैरिकेडिंग की समीक्षा करने और गैर-कानूनी हिरासत रोकने को लेकर भी निर्देश दिए गए। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कई जगहों पर लोगों को परेशान किया गया और अदालत के पहले के निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
Supreme Court Order: मेट्रो, इंटरनेट और ट्रैफिक पर क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट के 8 मुख्य निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कई अहम बातें कहीं:
1. मेट्रो और ट्रेनें सामान्य रूप से चलेंगी: सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कानून के तहत जरूरी स्थिति बनने पर ही सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
2. दिल्ली में लोगों की आवाजाही रोक नहीं: ट्रैफिक नियमों के अधीन लोगों को शहर में आने-जाने की अनुमति होनी चाहिए।
3. बैरिकेडिंग की तुरंत समीक्षा हो: अधिकारी कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति देखकर तय करें कि कहां बैरिकेड जरूरी हैं।
4. इंटरनेट बिना बाधा जारी रहें: कानून के मुताबिक इंटरनेट सुविधा बाधित नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, कानूनी कार्रवाई करने की प्रशासन की शक्तियां बनी रहेंगी।
5. गैर-कानूनी हिरासत नहीं हो: किसी व्यक्ति को कानून में तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता, खासकर उन क्षेत्रों में जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है।
6. शांतिपूर्ण और निहत्थे जमावड़े की अनुमति कानून के मुताबिक हो: जहां धारा 163 लागू नहीं है, वहां शांतिपूर्ण सभा पर गैर-कानूनी रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।
7. सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 का नोटिस हटाया जाए: अदालत ने अधिकारियों को संबंधित प्रतिबंध वाला बोर्ड हटाने का निर्देश दिया, ताकि लोगों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में बाधा की आशंका न रहे।
8. वकीलों को पेशेवर काम करने से न रोका जाए: वकीलों को अपने पेशेवर कर्तव्य निभाने और अदालत तक पहुंचने में बाधा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध करने और लोगों को न भड़काने की अपील भी की।
#BREAKING Supreme Court says it will pass an interim order that Metro should function in all normality until law and order situation arises, Free movement of public, Internet be restored and Lawyers shall not be impeded in discharging their professional duties.
#SupremeCourt #CECProtest
— Live Law (@LiveLawIndia) October 11, 2026
CJP Protest: दिल्ली में क्या-क्या पाबंदियां लगाई गई थीं?
प्रदर्शन से पहले राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे।
सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक निजामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों की आवाजाही भी रोकी गई थी। कुछ इलाकों में इंटरनेट पर भी रोक थी।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि 10 अक्टूबर को दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों पर पूरी तरह रोक न लगे।
Court Observations: 'हम निष्पक्ष हैं, लेकिन मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे'
आदेशों के उल्लंघन पर सवाल: बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि शुक्रवार को दिए गए कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शनिवार को 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए और निजामुद्दीन व नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनें रोकी गईं।
वकीलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सीख: कोर्ट ने प्रदर्शनकारी वकीलों से कहा कि वे केवल शांतिपूर्ण तरीका अपनाएं और लोगों को न भड़काएं। पीठ ने कहा, "हम निष्पक्ष मध्यस्थ हैं, लेकिन अनुच्छेद 32 के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है।"
Government Response & Next Hearing: मंगलवार तक मांगा अनुपालन जवाब
याचिकाकर्ताओं द्वारा बेवजह परेशानी और अवैध हिरासत के आरोप लगाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में शुरुआती आदेश जारी किए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और प्रशासन से कोर्ट के इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय करते हुए अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
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