Supreme Court Alert: आवारा कुत्ते सिर्फ काटते नहीं, हादसों और मौतों का कारण बन रहे हैं। कोर्ट ने कहा-सड़कें खाली रखनी होंगी। कुत्तों की नसबंदी, वापसी और सुरक्षा के बीच फंसा बड़ा सवाल। जानिए सुनवाई की पूरी टाइमलाइन और कोर्ट की चिंता।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: आवारा कुत्तों से सड़कें खाली क्यों करना जरूरी हो गया है?
Supreme Court On Stray Dogs: देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमले, सड़क हादसे और बच्चों पर बढ़ते खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी, क्योंकि ये सिर्फ काटते ही नहीं, बल्कि गंभीर दुर्घटनाओं और मौतों की वजह भी बन रहे हैं। इस टिप्पणी ने पूरे देश में बहस को फिर से तेज कर दिया है।
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क्या आवारा कुत्ते सिर्फ जानवर हैं या बढ़ता सुरक्षा खतरा?
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली। इस दौरान बहस केवल डॉग बाइट तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क सुरक्षा, बच्चों की जान, बुजुर्गों की सुरक्षा और आम नागरिकों के अधिकार जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि समस्या सिर्फ काटने की नहीं है। आवारा कुत्तों से सड़क दुर्घटनाओं का भी बड़ा खतरा है। उन्होंने सवाल उठाया—“आप कैसे पहचान करेंगे कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है?” यही अनिश्चितता सबसे बड़ा खतरा है।
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“आप खुशकिस्मत हैं”- कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कुत्तों के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि मंदिरों या सार्वजनिक जगहों पर उन्हें कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखा जवाब दिया- “आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है, लोग मर रहे हैं।” कोर्ट का यह बयान साफ करता है कि मामला अब व्यक्तिगत अनुभव का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का बन चुका है।
नसबंदी के बाद कुत्तों को वापस छोड़ना कितना सुरक्षित?
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर कुत्ता काटता है, तो उसे पकड़कर नसबंदी की जाती है और फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यंग्य करते हुए कहा- “बस अब कुत्तों की काउंसलिंग ही बाकी रह गई है।” यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि मौजूदा सिस्टम से कोर्ट संतुष्ट नहीं है। बुधवार को सुनवाई अधूरी रहने के कारण इसे रोक दिया गया। अब अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे होगी। कोर्ट संकेत दे चुका है कि वह इस मुद्दे पर सख्त और व्यावहारिक फैसला दे सकता है।
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आवारा कुत्तों के केस की पूरी टाइमलाइन क्या कहती है?
28 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने रेबीज से हो रही मौतों पर खुद संज्ञान लिया
11 अगस्त 2025: दिल्ली-NCR से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश
22 अगस्त 2025: नसबंदी के बाद छोड़ने और खूंखार कुत्तों को कैद में रखने का निर्देश
7 नवंबर 2025: हाईवे और सड़कों से आवारा पशु हटाने का आदेश
18 दिसंबर 2026: कोर्ट ने पूछा-“मानवता क्या है?”
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5 करोड़ कुत्तों की आबादी से सिस्टम कैसे निपटेगा?
सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल ने बताया कि भारत में 5 करोड़ से ज्यादा कुत्ते हैं। इनके लिए जरूरी शेल्टर, भोजन और सुरक्षा व्यवस्था पर अरबों रुपये का खर्च आएगा। जब स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय तक नहीं हैं, तो फेंसिंग और सुरक्षा कैसे संभव है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि अब मामला भावनाओं से ऊपर उठकर सुरक्षा और व्यवहारिक समाधान की ओर बढ़ रहा है। सवाल सिर्फ कुत्तों का नहीं, बल्कि इंसानी जान की प्राथमिकता का है।
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