Supreme Court TMC Case: संसद में बगावत पर सुप्रीम चाबुक! 20 बागी सांसदों पर लटकी तलवार!

Published : Aug 25, 2026, 03:05 PM IST
supreme court tmc rebel mps abhishek banerjee disqualification petition om birla notice

सार

TMC के 20 बागी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, अभिषेक बनर्जी की याचिका से बढ़ी हलचल। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस क्यों नहीं मिला और अब अयोग्यता पर क्या होगा बड़ा फैसला? जानिए दल-बदल विवाद पर अदालत के फैसले का पूरा रहस्य!

Supreme Court Notice Rebel TMC MPs: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा आंतरिक घमासान अब देश की शीर्ष अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। पार्टी के महासचिव और लोकसभा में TMC नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 20 बागी सांसदों और लोकसभा के महासचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह याचिका लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पास लंबे समय से लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर एक निश्चित और समयबद्ध सीमा के भीतर फैसला कराने के निर्देश की मांग को लेकर दाखिल की गई थी।

संवैधानिक मर्यादा और तुषार मेहता का हस्तक्षेप: क्यों नहीं जारी हुआ स्पीकर को नोटिस?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ में सुनवाई की शुरुआत में न्यायाधीश लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी औपचारिक नोटिस जारी करने के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। हालांकि, केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए अदालत को बताया कि वे स्वयं लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हो रहे हैं, इसलिए संवैधानिक पद पर आसीन अथॉरिटी को औपचारिक नोटिस भेजने की आवश्यकता नहीं है। SG ने पीठ को सूचित किया कि स्पीकर ने अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही प्रक्रिया शुरू कर नोटिस जारी कर दिए हैं।

"समय पर निपटारा ही सबसे अहम": सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सॉलिसिटर जनरल के तर्क पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया, "हम किसी संवैधानिक संस्था या पद के खिलाफ आदेश पारित नहीं करना चाहते, लेकिन यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कार्यवाही का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा के भीतर हो। सवाल महज नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का है।" कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि दल-बदल से जुड़े मामलों में अनिर्णय की स्थिति लंबे समय तक नहीं बनी रहनी चाहिए।

NCPI का दामन थामने से भड़का विवाद: दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग

यह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ जब हाल ही में चुनाव जीतने के बाद TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया और खुद को 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) से जुड़े होने का दावा किया। बागी गुट ने संसद में अलग मान्यता और अलग सीटों की मांग की थी, जिसे हालिया मॉनसून सत्र के दौरान स्वीकार भी कर लिया गया था। TMC का तर्क है कि ये सभी नेता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं और दूसरी राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनना संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत सीधे तौर पर सदस्यता छोड़ने के समान है।

दिग्गज चेहरों पर लटकी तलवार: कौन हैं 20 बागी सांसद?

याचिका में प्रतिवादी बनाए गए 20 प्रमुख नेताओं में सायनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, दीपक देव अधिकारी (देव) और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम शामिल हैं। याचिका के मुताबिक, इन सांसदों ने TMC के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद बाद में एक अपेक्षाकृत अनजान राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इन सभी बागी नेताओं को अदालत के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करना होगा। इस कानूनी मोड़ के बाद पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी करना मामले को अगले कानूनी चरण में ले गया है। अब 20 सांसदों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा, जबकि लोकसभा की अयोग्यता कार्यवाही की समयसीमा भी चर्चा के केंद्र में आ सकती है। फिलहाल अदालत ने किसी सांसद को अयोग्य घोषित नहीं किया है और न ही स्पीकर के खिलाफ कोई आदेश पारित किया है। लेकिन सुनवाई में “एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्यवाही पूरी करने” पर जोर दिए जाने से साफ है कि मामले की असली लड़ाई अब अयोग्यता के साथ-साथ उसके समयबद्ध निपटारे को लेकर भी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि 20 बागी सांसदों की सदस्यता पर फैसला किस दिशा में जाता है और लोकसभा स्पीकर की लंबित कार्यवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

BPSC पर फिर बवाल! पटना में CM आवास की ओर बढ़े छात्रों पर वॉटर कैनन की बौछार, पुलिस से टकराव
पापा विधायक हैं हमारे! MLA की बेटी ने महिला पुलिस को जड़ा थप्पड़, मंदिर के अंदर हो गया कांड