पाकिस्तान से तनाव के बीच तालिबान ने भारत पर जताया भरोसा, भारतीय कंपनी को करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट

Published : May 13, 2026, 07:31 PM IST
Taliban Signs 46 3 Million Dollar Deal With Indian Company Amid Rising Tensions With Pakistan

सार

India Taliban Relations: भारत और तालिबान के रिश्तों में नई गर्माहट दिखी है। तालिबान ने भारतीय कंपनी TCRC के साथ 46.3 मिलियन डॉलर की बड़ी डील साइन की है। अफगानिस्तान के बॉर्डर पोर्ट्स और काबुल में एडवांस्ड लैब बनाए जाएंगे। जानिए पूरी डील का महत्व।

एक समय था जब अफगानिस्तान में तालिबान का नाम आते ही भारत सतर्क हो जाता था. लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदलती दिखाई दे रही है. कूटनीति के गलियारों में भारत और तालिबान के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चा तेज है. इसी बीच एक बड़ा आर्थिक समझौता सामने आया है, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति और रणनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है.

तालिबान प्रशासन ने एक भारतीय कंपनी के साथ 46.3 मिलियन डॉलर का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. इस समझौते के तहत अफगानिस्तान के प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग्स और राजधानी काबुल में एडवांस्ड लैबोरेटरी कॉम्प्लेक्स तैयार किए जाएंगे. यह डील ऐसे समय में हुई है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ रहा है और सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं.

 

 

भारतीय कंपनी TCRC को मिला बड़ा प्रोजेक्ट

यह समझौता अफगानिस्तान स्टैंडर्ड्स एंड क्वालिटी अथॉरिटी और भारतीय कंपनी TCRC के बीच साइन किया गया. इस मौके पर तालिबान सरकार के आर्थिक मामलों के उप-प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर भी मौजूद रहे, जिससे इस डील की अहमियत और बढ़ गई. तालिबान अधिकारियों के अनुसार, यह पांच साल का प्रोजेक्ट होगा, जिसके तहत काबुल समेत देश के नौ प्रमुख बॉर्डर पोर्ट्स पर आधुनिक लैबोरेटरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इन लैब्स का इस्तेमाल विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता जांच और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा.

 

 

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किन चीजों की होगी टेस्टिंग?

अफगानिस्तान स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के प्रमुख फैजुल्ला तमीम ने बताया कि इन लैबोरेटरीज़ में निर्माण सामग्री, बिजली से जुड़े उपकरण, टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स, चमड़े और कागज से बने सामान की टेस्टिंग की जाएगी. इसके अलावा भारतीय कंपनी अत्याधुनिक लैब उपकरण भी लगाएगी और पुराने टेस्टिंग सिस्टम को अपग्रेड करेगी. प्रोजेक्ट के तहत विदेशी विशेषज्ञों की मदद से अफगान कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि स्थानीय स्तर पर तकनीकी क्षमता मजबूत हो सके.

 

 

ISO सर्टिफिकेशन पर भी फोकस

फैजुल्ला तमीम के मुताबिक, इस समझौते का एक बड़ा उद्देश्य अफगानिस्तान की लैबोरेटरी सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाना भी है. इसके लिए इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (ISO) से मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन हासिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा. तालिबान प्रशासन का मानना है कि इससे अफगानिस्तान में उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और घटिया आयातित सामान पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

पाकिस्तान से तनाव के बीच बढ़ी भारत की भूमिका

यह डील ऐसे वक्त में सामने आई है जब तालिबान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सीमा पर झड़पों के बाद कई बॉर्डर क्रॉसिंग बंद हैं, जिसका असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम पहले ही चेतावनी दे चुका है कि सीमा बंद रहने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी आई है और अफगान परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है. ऐसे हालात में भारत की एक कंपनी को मिला यह बड़ा कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ कारोबारी समझौता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे क्षेत्रीय रणनीति और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.

भारत-तालिबान रिश्तों में क्या बदल रहा है?

पिछले कुछ समय में भारत और तालिबान के बीच संपर्क बढ़ा है. भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता भेजने के साथ-साथ विकास परियोजनाओं में भी रुचि दिखाई है. हालांकि भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच संवाद लगातार जारी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता आने वाले समय में भारत की अफगानिस्तान में रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत कर सकता है, खासकर तब जब पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं.

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