
Thalapathy Vijay Challenges After Win Tamilnadu: 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम ने पहली बार में ही बड़ी जीत दर्ज की। जहां ज्यादातर लोग खासकर एमके स्टालिन और उनकी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) विजय की पार्टी TVK को हल्के में ले रहे थे, वहीं TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। DMK को सिर्फ 59 सीटें मिलीं और उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा। हालांकि, इस जीत के बाद भी थलापति विजय के पास चुनौतियां कम नहीं हैं। जानते हैं इस बड़ी जीत के बाद विजय के सामने क्या-क्या चैलेंजेस हैं।
हालांकि TVK ने बड़ी जीत हासिल की, लेकिन बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और पार्टी 10 सीट कम रह गई। अब सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने और स्थिरता बनाए रखने की है।
अगर भविष्य की कल्पना करें, तो एक ऐसा समय दिखता है जब TVK पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है और विजय मुख्यमंत्री हैं। लेकिन उनका कार्यकाल आसान नहीं होगा और उन्हें कई आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
TVK को 34.9% वोट मिले हैं। यह एक बड़ा समर्थन है, लेकिन इसके साथ ही जनता की उम्मीदें भी बहुत बढ़ गई हैं। अगर ये उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, तो यही समर्थन जल्दी नाराजगी में बदल सकता है। विजय और उनकी पार्टी पर चुनावी वादों का आर्थिक बोझ भी रहेगा, जिसमें उन्होंने शादी करने वाली महिलाओं को 8 ग्राम सोना, महिला मुखियाओं को 60 साल तक ₹2500 प्रति माह, 'बेबी वेलकम किट' और अतिरिक्त सोना, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और हर साल 6 मुफ्त LPG सिलेंडर जैसे बड़े वादे शामिल हैं। इन योजनाओं पर भारी खर्च आएगा। उदाहरण के लिए, सोने की कीमत ₹14,000 प्रति ग्राम मानें तो हर दुल्हन पर करीब ₹1.02 लाख खर्च होगा।
तमिलनाडु एक बड़ा और समृद्ध राज्य है, लेकिन अंदरूनी आर्थिक दबाव भी हैं। राजधानी चेन्नई पहले से ही भीड़, पानी की कमी, प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। विजय को तय करना होगा कि वे कल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे।
DMK सरकार के दौरान राज्य और केंद्र (BJP) के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे। टैक्स बंटवारा, हिंदी भाषा और परिसीमन जैसे मुद्दों पर लगातार टकराव हुआ। विजय ने भी संकेत दिया है कि उनका रुख इन मुद्दों पर DMK जैसा ही रहेगा।
तमिलनाडु में “दिल्ली बनाम राज्य” की राजनीति अहम है। विजय के सामने चुनौती यह होगी कि वे केंद्र के साथ मिलकर विकास करें। साथ ही तमिल पहचान को बनाए रखें।इसके लिए उन्हें मजबूत टीम और नेतृत्व विकसित करना होगा।
58 साल की उम्र में विजय राजनीति और प्रशासन में नए हैं। हालांकि,उन्होंने चुनावी रणनीति में समझदारी दिखाई है, लेकिन अब असली परीक्षा शासन की है। बहुमत न होने के कारण TVK को समर्थन की जरूरत है, लेकिन विकल्प सीमित हैं।
विजय के पास कुछ विकल्प हैं। जैसे- अल्पमत सरकार बनाना, बाद में मुद्दों के आधार पर समर्थन लेना, विपक्षी विधायकों का समर्थन हासिल करना। हालांकि, ऐसे कदम राजनीतिक छवि पर असर डाल सकते हैं। कुल मिलाकर विजय की यह जीत उनके राजनीतिक सफर का सिर्फ पहला हिस्सा है। अब असली कहानी शुरू होती है, जहां उन्हें अपने वादों, उम्मीदों और राजनीतिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना होगा।
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