72 घंटे में US-Iran Talks? ट्रंप का एक और बड़ा दावा, होर्मुज़ और IRGC पर टकराव तेज

Published : Apr 23, 2026, 10:34 AM IST

Trump Iran Negotiations: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 72 घंटे में Iran से बातचीत के संकेत दिए। शर्तों में IRGC, Strait of Hormuz खोलना शामिल। ईरान ने दबाव में वार्ता से इनकार किया, परमाणु विवाद और सीजफायर पर गतिरोध बरकरार। 

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US Iran Talks 72 Hours: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया बयान ने वैश्विक कूटनीति में अचानक हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर अगले 36 से 72 घंटों के भीतर हो सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि शुक्रवार तक “अच्छी खबर” सामने आ सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और दुनिया की नजरें इस संभावित वार्ता पर टिकी हैं।

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इस्लामाबाद कनेक्शन: पर्दे के पीछे कौन कर रहा है मध्यस्थता?

दिलचस्प बात यह है कि इस बातचीत के संभावित स्थान को लेकर भी संकेत मिले हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में हो सकती है, तो उन्होंने इसे “संभव” बताया। इससे साफ है कि इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्रीय शक्तियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैक-चैनल डिप्लोमेसी के जरिए माहौल तैयार किया जा रहा है।

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ट्रंप की सख्त शर्तें: बातचीत या दबाव की रणनीति?

ट्रंप ने ईरान के सामने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दे। साथ ही, ईरानी प्रतिनिधिमंडल को किसी भी संभावित शांति समझौते को अंतिम रूप देने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। इन शर्तों को देखकर यह साफ है कि अमेरिका केवल औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहता है।

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तेहरान का रुख: दबाव में नहीं झुकेगा ईरान

दूसरी ओर, ईरान का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकी के तहत बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रगति के लिए एक विश्वसनीय युद्धविराम और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का पूर्ण विराम आवश्यक है।

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पहले दौर की नाकामी: क्या फिर दोहराएगा इतिहास?

अप्रैल में हुई पहली बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। इसका मुख्य कारण दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास और परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद था। अमेरिका जहां इसे खत्म करना चाहता है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है।

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अनिश्चितता का धुंध: क्या होगा आगे?

हालांकि ट्रंप के बयान से उम्मीदें जगी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी अस्पष्ट है। ईरान ने अब तक यह तय नहीं किया है कि वह इस नए दौर की बातचीत में शामिल होगा या नहीं। वहीं, वॉशिंगटन ने युद्धविराम को बढ़ाते हुए सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोक रखी है। आने वाले 72 घंटे बेहद अहम साबित हो सकते हैं। फिलहाल, दुनिया इंतजार कर रही है-एक ऐसे फैसले का, जो पूरे क्षेत्र की दिशा बदल सकता है।

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