Trump Tariff Refund: किसे मिलेगा टैरिफ रिफंड, कौन है पाने का असल हकदार?

Published : Feb 21, 2026, 03:44 PM IST

Trump Tariff Latest Update: US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि टैक्स के रूप में जो 133 अरब डॉलर वसूल किए हैं, उनका क्या होगा?

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किसे मिलेगा रिफंड?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएस चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने शुक्रवार को कहा कि भारत और ब्राजील से आयात किए गए कुछ सामान पर लगाए गए टैरिफ के लिए रिफंड दिया जाएगा। चैंबर के मुताबिक, वे अमेरिकी आयातक रिफंड के पात्र होंगे, जिन्होंने सीधे तौर पर टैरिफ का भुगतान किया है। या फिर वे व्यक्ति/कंपनी जो सीमा शुल्क क्लियरेंस के बाद माल के मालिक बने। मतलब साफ है कि रिकॉर्ड में दर्ज वही इंपोर्टर, जिन्होंने वास्तव में शुल्क चुकाया है, उन्हें ही रिफंड मिल सकता है।

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किन फर्मों को नहीं मिलेगा रिफंड?

चैंबर ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों ने सीधे टैरिफ का भुगतान नहीं किया, वे रिफंड के पात्र नहीं होंगी। रिफंड सिर्फ उन शुल्कों के लिए संभव है जो IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट) के तहत लगाए गए थे। अगर किसी फर्म ने लागत बढ़ोतरी तो झेली, लेकिन टैरिफ सीधे जमा नहीं किया, तो उसे रिफंड नहीं मिलेगा।

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इलिनोइस के गवर्नर ने मांगा 9 अरब डॉलर रिफंड

डेमोक्रेट नेता जेबी प्रिट्जकर ने ट्रंप को एक इनवॉइस भेजा है। इसमें उन्होंने इलिनोइस के परिवारों के लिए लगभग 9 बिलियन डॉलर के टैरिफ रिफंड की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन टैरिफ की वजह से किसानों को नुकसान हुआ, सहयोगी देशों के साथ रिश्ते बिगड़े और रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ीं। प्रिट्जकर ने हर परिवार के लिए लगभग 1700 डॉलर की वापसी की मांग की है।

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कंपनियां भी रिफंड की कतार में

सिर्फ राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि कई बड़ी कंपनियां भी रिफंड के लिए आगे आ रही हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं को सीधे पैसे मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। क्योंकि टैरिफ की रकम आमतौर पर इंपोर्टर्स से ली गई थी, इसलिए रिफंड भी पहले कंपनियों को मिलने की संभावना ज्यादा है। कुल रिफंड 175 अरब डॉलर तक हो सकता है।

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बड़ी कंपनियों ने पहले ही दायर किए केस

कई बड़ी कंपनियां पहले ही रिफंड के लिए मुकदमा कर चुकी हैं। इनमें कॉस्टको, रेवलॉन और बम्बल बी फूड्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही केस दर्ज कर दिए थे, ताकि टैरिफ खत्म होने पर वे रिफंड पाने की लाइन में आगे रहें।

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