
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी अब उस मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है, जहां किसी भी छोटी चूक का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि उसने पिछले 48 घंटों में छह ड्रोन मार गिराए हैं। इससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगी गुटों के बीच पर्दे के पीछे तेज कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां चल रही हैं।
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका ईरान पर स्ट्राइक करने के कितना करीब पहुंच गया था, तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “सिर्फ एक घंटे की दूरी” पर था। ट्रंप के मुताबिक, अंतिम समय में उन्हें एक फोन कॉल मिला, जिसमें कहा गया कि बातचीत और समझौते की संभावना अभी बाकी है। इसके बाद सैन्य कार्रवाई को रोका गया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि भविष्य में हमला नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी स्थिति का सबसे अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं निकला तो क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं होगी। ट्रंप ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच नई वार्ता शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, शनिवार या रविवार तक बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना है। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान को “एक और बड़ा झटका” दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान एक तरफ दबाव की रणनीति है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।
तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को नया शांति प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान ने अपने प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर दुश्मनी समाप्त करने की बात शामिल है। ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य मौजूदगी कम हो और क्षेत्र में स्थायी समाधान की दिशा में पहल की जाए। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, यह प्रस्ताव ईरान की तरफ से तनाव कम करने की कोशिश भी हो सकती है, लेकिन अमेरिका की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने सुरक्षा मोर्चे पर बड़ा दावा किया है। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार पिछले 48 घंटों में छह ड्रोन को मार गिराया गया है। इनमें से तीन ड्रोन रविवार को हमले की कोशिश में थे। हालांकि ड्रोन किस समूह ने भेजे थे, इसे लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय हालात को देखते हुए शक की सुई ईरान समर्थित गुटों की ओर घूम रही है। ड्रोन गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी ने खाड़ी देशों की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को अब पूरी दुनिया ध्यान से देख रही है। यदि बातचीत सफल होती है तो मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कुछ हद तक रोका जा सकता है। लेकिन अगर वार्ता विफल रही, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा स्थिति सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं रह गई है। इसमें इजरायल, खाड़ी देश और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी सीधे प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि हर नया बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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