ट्रंप से फोन कॉल और फिर बड़ा खेल! तुर्की में एर्दोआन ने पलट दी पूरी राजनीति

Published : May 22, 2026, 03:50 PM IST
Turkey Politics Intensifies as Erdogan Major Decisions Trigger Debate Over Democracy and Power

सार

Recep Tayyip Erdogan Latest Update: तुर्की में राष्ट्रपति एर्दोआन के तीन बड़े फैसलों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई, यूनिवर्सिटी बंद करने और आर्थिक फैसलों के बाद लोकतंत्र और सत्ता संतुलन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

Turkey Political News: तुर्की की राजनीति में पिछले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan की सत्ता को और मजबूत करने वाले तीन बड़े फैसलों ने देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है, जबकि सरकार इन कदमों को देश की स्थिरता और सुरक्षा से जोड़कर देख रही है।

करीब एक दशक से ज्यादा समय से तुर्की की सत्ता पर काबिज एर्दोआन को लेकर लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि वे देश की राजनीति और संस्थाओं पर पूरी पकड़ चाहते हैं। 2024 के बाद से तुर्की में जिस तरह विपक्षी नेताओं, संस्थानों और आर्थिक फैसलों पर तेजी से कार्रवाई हुई है, उसने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।

अदालत के फैसले से विपक्ष को बड़ा झटका

तुर्की की स्थानीय अदालत ने प्रमुख विपक्षी दल CHP के आम अधिवेशन को अमान्य करार दिया है। इस फैसले के बाद पार्टी नेतृत्व पर भी असर पड़ा और विपक्षी नेता ओजगुर ओजल को पद से हटाने का रास्ता साफ हो गया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब तुर्की में पहले से ही विपक्ष सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने के आरोप लगा रहा है। विपक्ष का कहना है कि न्यायपालिका का इस्तेमाल कर राजनीतिक विरोधियों को कमजोर किया जा रहा है।

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इमामोग्लू ने कहा- लोकतंत्र पर खतरा

जेल में बंद इस्तांबुल के पूर्व मेयर Ekrem İmamoğlu ने एर्दोआन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इमामोग्लू का कहना है कि विपक्षी नेताओं को योजनाबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है ताकि सत्ता के खिलाफ कोई मजबूत आवाज न बच सके। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील भी की। गौरतलब है कि इमामोग्लू को तुर्की में राष्ट्रपति पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। विपक्ष लगातार दावा करता रहा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से की गई।

आर्थिक संकट के बीच बड़ा आर्थिक फैसला

तुर्की सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बेचने का फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने करीब 8 बिलियन डॉलर के बॉन्ड बेचे हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर तुर्की की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई और बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए अंकारा सख्त आर्थिक कदम उठा रहा है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह फैसला तुर्की की आर्थिक मजबूरी को भी दर्शाता है।

विश्वविद्यालय बंद करने के फैसले पर भी विवाद

सरकार ने विल्गी यूनिवर्सिटी को बंद करने का फैसला भी लिया है। आरोप है कि इस संस्थान से लगातार एर्दोआन विरोधी अभियान चलाया जा रहा था। इस कदम के बाद तुर्की में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अकादमिक स्वायत्तता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तुर्की में अब सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन भी सरकार के रडार पर आ रहे हैं।

ट्रंप से बातचीत के बाद बढ़ी अटकलें

इन तीनों फैसलों के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से हुई फोन बातचीत को भी जोड़ा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एर्दोआन और ट्रंप के बीच सीरिया और ईरान के मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी तरह का सीधा संबंध स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि अमेरिका तुर्की की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित है। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट से जुड़ी विशेषज्ञ गोनुल टोल का कहना है कि वॉशिंगटन तुर्की में हो रही हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है, लेकिन अब तक अमेरिका की ओर से कोई सख्त प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या तुर्की में और मजबूत हो रही है राष्ट्रपति प्रणाली?

तुर्की में बीते कुछ वर्षों में राष्ट्रपति प्रणाली लगातार मजबूत हुई है। विपक्ष का आरोप है कि संसद, न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाओं की स्वतंत्रता धीरे-धीरे कम हो रही है। वहीं एर्दोआन समर्थकों का तर्क है कि मजबूत नेतृत्व के बिना क्षेत्रीय संकटों और आर्थिक चुनौतियों से निपटना मुश्किल है। फिलहाल इन तीन फैसलों ने यह साफ संकेत जरूर दिया है कि तुर्की की राजनीति आने वाले समय में और ज्यादा केंद्रीकृत हो सकती है। इसका असर सिर्फ तुर्की तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।

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