
होटल में कमरा बुक करना हो या अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होना हो, आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करना आम बात है। लेकिन अब यह पुराना तरीका बदलने वाला है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 300 से ज्यादा नई संस्थाओं को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम से जोड़ा है। इससे लोगों को बार-बार आधार की कॉपी देने की जरूरत कम होगी और उनकी निजी जानकारी भी ज्यादा सुरक्षित रह सकेगी।
UIDAI ने होटल, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, इवेंट मैनेजमेंट और गिग इकॉनमी से जुड़ी करीब 300 संस्थाओं को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) के रूप में रजिस्टर किया है। इसका मकसद पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है। यानी अब संस्थाएं कागजी दस्तावेजों के बजाय डिजिटल माध्यम से पहचान की पुष्टि कर सकेंगी।
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इस नई व्यवस्था में आधार ऐप की अहम भूमिका होगी। किसी होटल, अस्पताल या दूसरी सेवा का लाभ लेते समय यूजर ऐप के जरिए अपनी पहचान सत्यापित कर सकेगा। खास बात यह है कि यूजर खुद तय कर सकेगा कि सामने वाली संस्था के साथ कौन-सी जानकारी साझा करनी है। उदाहरण के लिए, जरूरत के मुताबिक सिर्फ नाम और फोटो जैसी जानकारी दी जा सकेगी।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत प्राइवेसी है। डिजिटल वेरिफिकेशन के दौरान यूजर का 12 अंकों वाला आधार नंबर संबंधित संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा वेरिफिकेशन करने वाली संस्थाओं को UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ने की जरूरत भी नहीं होगी। इससे आधार नंबर और दूसरी संवेदनशील जानकारियों के गलत इस्तेमाल का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।
UIDAI के आंकड़ों के मुताबिक, आधार ऐप को अब तक करीब 7.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। लगभग 86 लाख लोग ऐप के जरिए आधार केंद्र जाए बिना अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट कर चुके हैं। वहीं, बायोमेट्रिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए यूजर्स ने 4.6 करोड़ से ज्यादा बार लॉक और अनलॉक फीचर का इस्तेमाल किया है।
UIDAI की यह पहल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून की भावना के अनुरूप है। इस कानून के तहत नागरिकों की निजी जानकारी उनकी सहमति से और जरूरत के मुताबिक ही इस्तेमाल की जानी चाहिए। हालांकि, नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भी यह देखना जरूरी होगा कि कितनी संस्थाएं इसे अपनाती हैं और यूजर्स को इसका लाभ किस स्तर पर मिलता है।
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