
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। इस्राइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। इसी बीच अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से साथ देने की अपील की, लेकिन ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि वह इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश किसी बाहरी आक्रामक युद्ध में अपनी सेना नहीं भेजेगा।
अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान के बीच दुनिया की नजरें ब्रिटेन पर भी टिकी थीं, क्योंकि वह लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया कि यह संघर्ष ब्रिटेन की लड़ाई नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा कोई फैसला नहीं लेगी जिससे देश की सेना को अनावश्यक खतरे में डाला जाए। ब्रिटेन की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित हैं। इसलिए फिलहाल ब्रिटेन इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा।
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सूत्रों के अनुसार, नाटो के कुछ देशों की तरफ से ब्रिटेन पर इस संघर्ष में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। अमेरिका भी चाहता था कि उसके करीबी सहयोगी इस सैन्य अभियान में साथ खड़े हों। इसके बावजूद प्रधानमंत्री स्टार्मर अपने फैसले पर कायम रहे। उन्होंने साफ किया कि ब्रिटेन किसी ऐसे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा जो आक्रामक हो और जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़े।
हालांकि ब्रिटेन ने पूरी तरह से खुद को अलग भी नहीं किया है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चाओं में हिस्सा लेगा। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने के मुद्दे पर ब्रिटेन सक्रिय रहेगा। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ब्रिटेन सरकार ने अमेरिका को साइप्रस में स्थित अपने सैन्य ठिकाने आरएएफ अक्रोतिरी के इस्तेमाल की सीमित अनुमति दी है। लेकिन इसके लिए कड़े नियम तय किए गए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल सिर्फ रक्षात्मक कार्यों के लिए किया जा सकता है। यानी अगर मिसाइल या ड्रोन हमले को रोकना हो तो इसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए इसकी अनुमति नहीं होगी। हाल के दिनों में रॉयल एयर फोर्स ने खाड़ी क्षेत्र में सहयोगी देशों की मदद करते हुए कुछ ईरानी ड्रोन को मार गिराया था।
ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिका में नाराजगी भी देखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन का यह रुख दोनों देशों के पुराने और खास रिश्तों के लिहाज से अच्छा संकेत नहीं है। उनका मानना है कि ऐसे समय में सहयोगियों को एकजुट होकर काम करना चाहिए था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन का फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक वजहों से भी जुड़ा हुआ है। अगर यह युद्ध और बढ़ता है और स्वेज नहर या होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों में बाधा आती है, तो तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। ऐसे हालात में ब्रिटेन की अर्थव्यस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री स्टार्मर ने युद्ध में कूदने के बजाय देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
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