भारत बना रेमिटेंस का बेताज बादशाह: 100 अरब डॉलर पार करने वाला अकेला देश! UN डेटा ने चौंकाया

Published : May 06, 2026, 02:38 PM IST

UN IOM रिपोर्ट 2026 में बड़ा खुलासा: भारत $137 अरब रेमिटेंस के साथ विश्व नंबर-1 बना। खाड़ी संकट, ऊर्जा सुरक्षा और ब्रेन ड्रेन के बीच भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4% ग्रोथ की ओर। क्या वैश्विक सिस्टम बदल रहा है?

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India Remittance 137 Billion USD 2024: संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) की वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 2024 में भारत ने 137 अरब डॉलर से अधिक रेमिटेंस प्राप्त कर दुनिया में पहला स्थान बनाए रखा। यह आंकड़ा न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि भारत को बाकी सभी देशों से काफी आगे रखता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अकेला ऐसा देश है जिसने 100 अरब डॉलर का स्तर पार किया है और लगातार वैश्विक रेमिटेंस लीडर बना हुआ है। जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिली है।

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एक दशक में दोगुना से अधिक वृद्धि

आंकड़ों के अनुसार, भारत की रेमिटेंस यात्रा तेज़ी से बढ़ी है:

  • 2010: $53.48 अरब
  • 2015: $68.91 अरब
  • 2020: $83.15 अरब
  • 2024: $137.67 अरब

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय (डायस्पोरा) की आर्थिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

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दूसरे देशों से कितना आगे है भारत?

भारत के बाद मेक्सिको, फिलीपींस और फ्रांस शीर्ष रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल रहे। लेकिन अंतर स्पष्ट है-भारत की कमाई बाकी देशों की तुलना में लगभग “डबल-डिजिट लीड” में है। 2010 से लगातार भारत इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है, और हर साल इसमें स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है।

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किन देशों से आता है सबसे ज्यादा पैसा?

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष, भारत के रेमिटेंस प्रवाह के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल रेमिटेंस का लगभग 38% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। इसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देश प्रमुख हैं। इसी वजह से मध्य-पूर्व में किसी भी तरह की राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता भारत के लिए सीधा जोखिम पैदा कर सकती है।

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6.4% ग्रोथ का अनुमान, लेकिन अस्थिरता बरकरार

IOM रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.4% की दर से बढ़ सकती है। मजबूत खपत और सेवा क्षेत्र इसकी मुख्य वजह बताए गए हैं। हालांकि वैश्विक व्यापार तनाव और ऊर्जा कीमतों की अस्थिरता इसे चुनौती दे सकती है।

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“ब्रेन ड्रेन” से “ब्रेन गेन” तक की जंग

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय डायस्पोरा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेक्टर में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत अब “ब्रेन ड्रेन” को “ब्रेन गेन” में बदलने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे विदेशों में बसे भारतीय वैज्ञानिक और उद्यमी देश के विकास में योगदान दे सकें।

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वैश्विक तस्वीर: भारत क्यों है केंद्र में?

एशिया में आपदाओं और विस्थापन की घटनाओं में भारत, फिलीपींस और चीन सबसे आगे रहे। वहीं, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे वैश्विक प्रवासन नेटवर्क में भारत की भूमिका और मजबूत हो रही है। UN रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है-भारत अब सिर्फ रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।

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