
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की असली ताकत केवल बड़े उद्योग नहीं, बल्कि गांव-कस्बों में चलने वाले छोटे कारोबार, बुनकरों के करघे और युवा उद्यमियों के सपने हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसी जमीनी अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), हथकरघा वस्त्र उद्योग और खादी ग्रामोद्योग के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान और नई योजनाओं की घोषणा की है। बजट के संकेत साफ हैं, रोजगार सृजन, परंपरागत उद्योगों का आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को गति देना।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। यह वही सेक्टर है, जिससे प्रदेश में लगभग 3.11 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। उत्तर प्रदेश एमएसएमई इकाइयों की संख्या के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
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नई योजनाएं और लक्ष्य
नीति विश्लेषकों का मानना है कि यदि 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यम प्रतिवर्ष स्थापित होते हैं, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग के लिए 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुने से अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 में इस क्षेत्र में 30,000 नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है।
प्रमुख पहल
बुनकर समुदाय के लिए बिजली दरों में राहत और आधुनिक टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल पारंपरिक उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
MSME और वस्त्र उद्योग दोनों ही सेक्टर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के प्रमुख स्रोत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़े हुए बजट आवंटन से स्थानीय उत्पादन, निर्यात और स्वरोजगार को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से “एक जनपद एक व्यंजन” और “युवा उद्यमी विकास अभियान” जैसी योजनाएं स्थानीय पहचान और ब्रांडिंग को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे छोटे कारोबार राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है, औद्योगिक विस्तार को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर जिलों और गांवों तक पहुंचाना। MSME, हथकरघा और खादी ग्रामोद्योग में निवेश को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो यह बजट उत्तर प्रदेश को रोजगार सृजन और परंपरागत उद्योगों के पुनरोद्धार के मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार रोजगार आधारित विकास मॉडल पर जोर दे रही है। 3,822 करोड़ रुपये MSME के लिए और 5,041 करोड़ रुपये हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग के लिए प्रस्तावित कर सरकार ने यह संकेत दिया है कि छोटे उद्योग ही बड़े आर्थिक परिवर्तन की नींव बन सकते हैं।
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