
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सबसे असरदार तरीका गन्ना के साथ दलहन और तिलहन की खेती को बड़े पैमाने पर अपनाना है। उन्होंने बताया कि यह मॉडल केवल गन्ना किसानों की आय को दोगुना नहीं करता बल्कि इसे कई गुना करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सोमवार को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और इस योजना को अगले पांच साल में मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल लगाने से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और पूरे साल स्टेबल इनकम मिलती है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और कृषि अधिक टिकाऊ बनती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का विस्तार अब सीमित है, इसलिए उत्पादन बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका है इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन। इस दृष्टिकोण से गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल बन सकता है, जो किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यह योजना मिशन मोड में लागू होगी। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस योजना को कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाए और अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर और जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का स्पष्ट ढांचा तैयार करने पर भी बल दिया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज कैश फ्लो मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा। इससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे प्रदेश के कृषि परिदृश्य में बदलाव लाने वाली होगी। अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के सकल राज्य मूल्य संवर्धन (GVA) में भी बड़ा योगदान देगा।
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