लखनऊ में 86वां पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन, UP विजन 2047 को मिली राष्ट्रीय सराहना

Published : Jan 21, 2026, 05:55 PM IST
86th AIPOC concludes Harivansh Narayan Singh praise UP vision 2047

सार

लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का गरिमामय समापन हुआ। राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने यूपी विजन 2047 की सराहना की। लोकतांत्रिक संवाद, नवाचार और जनहित को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

लखनऊ। देशभर की विधायी संस्थाओं के अनुभव, संवाद और साझा संकल्प का मंच बने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन लखनऊ में गरिमामय वातावरण में हुआ। समापन समारोह में लोकतंत्र की मजबूती, जनहित को सर्वोपरि रखने की भावना और बदले हुए उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक पहचान स्पष्ट रूप से सामने आई। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने उत्तर प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट–2047 की सराहना करते हुए इसे सभी राज्यों के लिए प्रेरणादायी बताया।

यूपी विजन 2047 लोकतांत्रिक संवाद का उत्कृष्ट उदाहरण: हरिवंश

समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सम्मेलन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों और विधायी पदाधिकारियों ने अपने अनुभव और नवाचार साझा किए, जो भविष्य में संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने में मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि चाहे विधानमंडल हो या सरकार, सभी का उद्देश्य संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है।

मुख्यमंत्री योगी और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की सराहना

हरिवंश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद विकसित उत्तर प्रदेश-2047 का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। यह दस्तावेज लोकतांत्रिक संवाद और सहभागिता के माध्यम से विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यह विजन डॉक्यूमेंट अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल है।

विधानसभा कार्यवाही में नवाचारों को बताया अनुकरणीय

राज्यसभा के उपसभापति ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा अध्यक्षों की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधायकों की सदन में उपस्थिति बढ़ाने और सोशल मीडिया के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही आम जनता तक पहुंचाने जैसे प्रयास लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाते हैं। उन्होंने देशभर के पीठासीन अधिकारियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों और नवाचारों को विधायी कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी बताया।

विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ: सतीश महाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने संबोधन में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन से सभी को दिशा और संबल मिलता है। उन्होंने देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है।

उन्होंने कहा कि विधायिका में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं, जिनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनहित की बात रखना, प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना और जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाना है।

यूपी की कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक मॉडल साझा करने का आह्वान

सतीश महाना ने कहा कि सम्मेलन के दौरान पीठासीन अधिकारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सभी राज्यों के एजेंडे अलग-अलग हों, लेकिन लक्ष्य एक ही है- जनहित और विकास।

उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश की कार्यसंस्कृति, प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव को अपने-अपने राज्यों में साझा करें, ताकि देशभर में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक सशक्त हो सके।

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