
लखनऊ। अगर आप उत्तर प्रदेश में वाहन चलाते हैं, तो यह खबर सीधे आपकी जेब और रोजमर्रा की सुविधा से जुड़ी है। प्रदूषण नियंत्रण को सख्ती से लागू करने की दिशा में उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। अब प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) बनवाने के लिए मोबाइल पर OTP अनिवार्य कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत वाहन की आरसी (Registration Certificate) में दर्ज मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, और उसी के सत्यापन के बाद ही PUC जारी किया जाएगा। लेकिन इस बदलाव ने लाखों वाहन मालिकों के सामने नई समस्या खड़ी कर दी है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 75% वाहनों की आरसी में दर्ज मोबाइल नंबर या तो पुराने हो चुके हैं या अब इस्तेमाल में नहीं हैं। ऐसे में OTP न मिलने की वजह से PUC सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पा रहा है। पहले जहां सिर्फ आरसी दिखाकर प्रदूषण प्रमाण पत्र मिल जाता था, अब OTP आधारित प्रक्रिया ने इसे पूरी तरह डिजिटल और सख्त बना दिया है।
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PUC ऑपरेटरों का कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया, जिससे आम लोगों को दिक्कत हो रही है। PUC ऑपरेटर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सुनील कुमार पाल के अनुसार,
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर वाहन के पास वैध PUC नहीं है, तो भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। मोटर व्हीकल नियमों के तहत PUC न होने पर 10,000 रुपये तक का चालान लगाया जा सकता है। ऐसे में तकनीकी समस्या के कारण लोग आर्थिक जोखिम में आ गए हैं।
एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए परिवहन आयुक्त को पत्र भेजा है। इसमें मांग की गई है कि:
इससे आम जनता को राहत मिल सकती है और व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हो सकेगी।
डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राधेश्याम ने पुष्टि की है कि संगठन का पत्र प्राप्त हो चुका है और समस्या के समाधान पर विचार किया जा रहा है। इस समस्या के साथ एक और शर्त ने परेशानी बढ़ा दी है। बिना HSRP (High Security Registration Plate) के भी कई जगह PUC सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा रहे। प्रदेश में करीब 2 करोड़ वाहन मालिक इस दोहरी चुनौती—OTP और HSRP—से जूझ रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है, लेकिन किसी भी नई नीति की सफलता उसकी तैयारी और क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। OTP आधारित PUC सिस्टम एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर डेटा अपडेट और तकनीकी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक आम लोगों के लिए यह सुविधा परेशानी का कारण बनी रहेगी। अब सभी की नजरें उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के अगले फैसले पर हैं, जो तय करेगा कि यह नियम राहत देगा या मुश्किलें बढ़ाएगा।
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