
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) इस वक्त एक ऐसे बारूदी मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है, जहाँ से तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़क सकती है। राजनयिक गलियारों में चल रही शांति की तमाम कोशिशों को मटियामेट करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के भीतर सीधे हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी बमवर्षक विमानों और मिसाइलों ने ईरान की संप्रभु सीमा को पार कर उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके साथ ही क्षेत्र में सैन्य अभियानों पर लगा संक्षिप्त विराम पूरी तरह खत्म हो गया। इस जवाबी कार्रवाई के शुरू होते ही ईरान के दक्षिणी हिस्सों में सिलसिलेवार और भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसने पूरी दुनिया को सन्नाटे में ला दिया है।
दरअसल, इस खूनी संघर्ष की पटकथा कुछ दिनों पहले ही लिख दी गई थी, जब ईरान ने सीधे अपने क्षेत्र से जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और एक एयरबेस को निशाना बनाकर कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस बात पर गर्व जताया था कि उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर पहला सीधा बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) के अनुसार, हालांकि उनके एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाली सभी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इस गुस्ताखी ने महाशक्ति के सब्र का बांध तोड़ दिया। राजनयिक बातचीत के लिए दिया गया समय अब खत्म हो चुका था और वॉशिंगटन ने अपनी बंदूकों का रुख सीधे तेहरान की तरफ मोड़ दिया।
जैसे ही घड़ी की सुइयों ने अमेरिकी समयानुसार रात के 8 बजाए (भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे), सेंटकॉम ने आधिकारिक पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक 'कड़ा और सीधा' जवाबी हमला शुरू कर दिया है। इसके तुरंत बाद, ईरान की सरकारी मीडिया और 'तस्नीम समाचार एजेंसी' ने देश के दक्षिणी हिस्से में भारी तबाही की खबरें देना शुरू किया। रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और वैश्विक व्यापार के मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थित 'केशम द्वीप' पर तीन भीषण धमाकों की पुष्टि हुई है। खबरों के मुताबिक, मिसाइलों ने द्वीप के रिहायशी और सैन्य इलाकों को निशाना बनाया है। इसके अलावा बुशहर और कई अन्य दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भी आग की लपटें और धुएं के गुबार देखे गए हैं, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर हताहतों की सही संख्या सामने नहीं आई है।
🇺🇸🇮🇷 U.S. Central Command says its forces carried out a major wave of strikes across Iran in response to Iran’s attempted missile attacks on U.S. forces in Jordan.
Dozens of IRGC targets were struck, including military command centres, missile and drone facilities, coastal… pic.twitter.com/iO7UqK4evK— Europa.com (@europa) July 30, 2026
तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयर बेस और एक अन्य सैन्य ठिकाने पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। CENTCOM का कहना है कि सभी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन यह घटना इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि हालिया दौर में यह अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का पहला प्रत्यक्ष बैलिस्टिक मिसाइल हमला बताया जा रहा है।
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इस सैन्य कार्रवाई के आदेश के ठीक बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सामने आकर बेहद आक्रामक और सस्पेंस से भरा बयान दिया। ट्रम्प ने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "अब हमारी बारी है। हम उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करने जा रहे हैं।" ट्रम्प ने जहाँ एक तरफ कड़ा सैन्य जवाब देने का वादा किया, वहीं दूसरी तरफ रहस्यमयी ढंग से बातचीत का रास्ता भी खुला रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन यह देखना चाहता है कि क्या इस भीषण झगड़े को खत्म करने के लिए कोई नया समझौता हो सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि व्हाइट हाउस में ट्रम्प और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया "फलदायी" मुलाकात के बाद, ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करने का गेमप्लान तैयार हो चुका है।
CENTCOM just announced a successful heavy wave of strikes against Iran after 3 hours!
This was in direct response to the IRGC’s attempted surprise ballistic missile attack on U.S. forces in the Middle East on July 28. Every Iranian missile was intercepted.
U.S. forces hit… pic.twitter.com/0xaUYVf85P— JJ🕊️ (@jesseyjay94) July 30, 2026
तनाव उस समय और बढ़ गया, जब व्हाइट हाउस में ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अहम बैठक हुई। इस बैठक में ईरान प्रमुख मुद्दा रहा। व्हाइट हाउस ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन उसके कुछ ही समय बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई फिर शुरू कर दी। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक आक्रामक रणनीति अपना सकता है।
यह खौफनाक तनाव अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका भौगोलिक दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इस हफ़्ते की शुरुआत में, सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में तेल ठिकानों को निशाना बनाकर इराकी क्षेत्र से कई ड्रोन हमले किए गए थे। इसके जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने एक संयुक्त और गुप्त ऑपरेशन चलाकर इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया पर घातक बमबारी की। सेंटकॉम के मुताबिक, इस साझा हमले में उनके लॉजिस्टिक्स हब और हथियारों के गुप्त ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। 'पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज' (PMF) ने स्वीकार किया है कि इस संयुक्त कार्रवाई में उनके कम से कम 20 लड़ाके मारे गए हैं।
अमेरिका द्वारा दोबारा हवाई हमले शुरू करना और ईरान में लगातार धमाकों की खबरें इस बात का संकेत हैं कि हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने की खबरें हैं, तो दूसरी ओर मिसाइल और हवाई हमलों का सिलसिला यह दिखा रहा है कि किसी भी छोटी चूक से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान की अगली सैन्य तथा कूटनीतिक चाल पर रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि पश्चिम एशिया बातचीत की राह चुनता है या फिर एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ता है। अब देखना यह है कि दक्षिणी ईरान में भड़की यह आग क्या पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले लेगी?
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