अब JASSM‑ER और टॉमहॉक से ईरान पर हमला: अमेरिका ने तैनात की अपनी सबसे घातक मिसाइलें!

Published : Apr 05, 2026, 06:54 AM IST
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सार

 अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए अपनी सबसे घातक JASSM-ER लंबी दूरी की मिसाइलें और B-52/B-1B बॉम्बर तैनात किए हैं। 1,000 से ज़्यादा मिसाइलें दागी गईं। F-15E और A-10 जेट मार गिराए गए। हथियारों का जखीरा कम पड़ गया है और वैश्विक तनाव बढ़ गया है। टोमाहॉक और क्रूज़ मिसाइल की रणनीति मध्य-पूर्व में संघर्ष का समीकरण बदल रही है।

Breaking Update: अमेरिका ने अपनी सबसे घातक लंबी दूरी की मिसाइलें अब ईरान पर हमले के लिए तैनात कर दी हैं। इसमें छोटी दूरी की JASSM मिसाइलें भी शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 250 मील है। कुल जखीरे का लगभग दो-तिहाई हिस्सा ईरान के लिए रिज़र्व किया गया है। यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि अब अमेरिका अपने अन्य संभावित मुकाबलों के लिए मिसाइलों का भंडार सीमित कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल संघर्ष में आखिर हो क्या रहा है?

 

 

JASSM-ER मिसाइलें कितनी खतरनाक हैं?

JASSM-ER यानी ‘जॉइंट एयर-टू-सरफेस मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज’ 600 मील से भी अधिक दूरी तक उड़ सकती हैं। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह दुश्मन की हवाई सुरक्षा प्रणालियों से दूर रहते हुए अपने लक्ष्यों को भेद सके। अब तक युद्ध के पहले चार हफ़्तों में US ने 1,000 से ज़्यादा JASSM-ER मिसाइलें इस्तेमाल की हैं।

क्या अमेरिकी जखीरे का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा?

प्रशांत क्षेत्र के भंडार से इन मिसाइलों को निकालने का आदेश मार्च में जारी किया गया। युद्ध-पूर्व 2,300 मिसाइलों में से अब लगभग 425 ही बाकी रह गई हैं। इसका मतलब यह है कि अमेरिका की अन्य जगहों के भंडार अब सीमित हैं। इसके अलावा, लगभग 75 मिसाइलें तकनीकी खराबी के कारण अब इस्तेमाल के लिए नहीं हैं।

क्या ट्रंप का ‘पाषाण युग’ बयान गंभीर है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अगले दो-तीन हफ़्तों में वे ईरान को “पाषाण युग” में वापस ले जाएंगे। हालांकि यह साफ़ नहीं है कि इसका असर आम नागरिकों, सेना या सरकार पर कैसे पड़ेगा। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर कयासों को जन्म दिया है और युद्ध की तीव्रता पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या ईरान ने भी जवाब दिया?

ईरान ने US के F-15E और A-10 स्ट्राइक जेट्स को मार गिराया। इसके अलावा 12 से अधिक MQ-9 स्ट्राइक ड्रोन भी नष्ट हुए हैं। खाड़ी देशों की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अब तक 1,600 बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 4,000 ‘शाहिद’ क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं। इसका मतलब है कि अमेरिकी इंटरसेप्टर सिस्टम को भी अधिक मेहनत करनी पड़ेगी।

क्या अमेरिका का फोकस सिर्फ ईरान पर है?

US ने B-52 और B-1B बॉम्बर्स से हमले तेज कर दिए हैं। इससे सैनिकों पर खतरा कम होता है, लेकिन चीन जैसे अन्य प्रतिद्वंद्वियों के लिए रखे हथियारों के जखीरे में कमी आ रही है। मिसाइलों का यह बड़ा इस्तेमाल भविष्य में अमेरिकी सैन्य क्षमता पर असर डाल सकता है।

क्या यह युद्ध लंबे समय तक चलेगा?

JASSM-ER और टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल अब तक जारी है। वर्तमान उत्पादन स्तरों को देखते हुए, इन हथियारों की भरपाई करने में कई साल लग सकते हैं। Lockheed Martin Corp. ने 2026 में लंबी दूरी की 396 नई मिसाइलें बनाने का लक्ष्य रखा है। यदि पूरी उत्पादन लाइन JASSM-ER पर केंद्रित की जाए, तो यह संख्या 860 तक बढ़ सकती है।

 

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