
American Pilot Training Secrets: ईरान और अमेरिका के बीच जंग और तनाव चरम पर है। हाल ही में खबर आई कि ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स (F-15 और A-10) को मार गिराया है। एक पायलट को तो बचा लिया गया, लेकिन दूसरे की तलाश अभी जारी है। अगर किसी फिल्म में आपने देखा हो कि जेट क्रैश होते ही पायलट दुश्मन के बीच फंस जाता है, तो असल जिंदगी इससे भी ज्यादा खतरनाक होती है। खासकर जब मामला अमेरिकी एयरफोर्स (United States Air Force) का हो, जहां हर सेकंड की कीमत जान बचाने से जुड़ी होती है। जैसे ही कोई फाइटर जेट दुश्मन इलाके में गिरता है, तुरंत एक हाई-लेवल मिशन एक्टिव हो जाता है, जिसका मकसद पायलट को जिंदा वापस लाना और किसी भी हालत में सीक्रेट टेक्नोलॉजी दुश्मन के हाथ न लगने देना होता है। अब सवाल ये है कि उस दौरान पायलट खुद क्या करता है? कैसे वो मौत से बचता है? आइए जानते हैं वो 3 खौफनाक तरीके, जो उसकी ट्रेनिंग का हिस्सा होते हैं।
जैसे ही पायलट इजेक्ट करता है और जमीन पर उतरता है, उसकी पहली कोशिश होती है खुद को पूरी तरह छिपा लेना। उसे पहले से सिखाया जाता है कि दुश्मन की नजर से कैसे बचना है, कहां छिपना है, कैसे कम मूवमेंट करना है और कब बिल्कुल शांत रहना है। पायलट छोटे-छोटे सिग्नल के जरिए अपनी टीम से संपर्क करता है, लेकिन ऐसा इस तरह करता है कि दुश्मन को भनक तक न लगे। उसका एक ही लक्ष्य होता है, किसी भी कीमत पर पकड़ा न जाए।
दुश्मन के इलाके में सिर्फ छिपना ही काफी नहीं होता, वहां जिंदा रहना भी उतना ही मुश्किल होता है। पायलट को ट्रेनिंग दी जाती है कि वो बिना किसी सपोर्ट के कई दिनों तक कैसे जिंदा रह सकता है। वो सीखता है कि कम रिसोर्सेज में पानी कैसे ढूंढना है, खाने के लिए क्या इस्तेमाल किया जा सकता है और शरीर की एनर्जी कैसे बचानी है। सबसे बड़ी बात, उसे मेंटली इतना मजबूत बनाया जाता है कि वो डर, भूख और थकान के बावजूद फैसला सही ले सके।
जैसे ही जेट क्रैश होता है, उसी वक्त से पायलट को बचाने के लिए मिशन शुरू हो जाता है। इसमें स्पेशल फोर्स, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और सैटेलाइट सब लग जाते हैं। United States Navy SEALs जैसे कमांडो या एयरफोर्स के पैरारेस्क्यू टीमें पायलट तक पहुंचने की कोशिश करती हैं। दूसरी तरफ पायलट लगातार अपनी लोकेशन छुपाते हुए सही समय का इंतजार करता है। ये एक रेस होती है, कौन पहले पहुंचता है, रेस्क्यू टीम या दुश्मन।
सबसे खतरनाक स्थिति यही होती है। दुश्मन पायलट से सीक्रेट जानकारी निकालने की कोशिश करता है या उसे प्रोपेगेंडा के लिए इस्तेमाल कर सकता है। इसीलिए ट्रेनिंग में पायलट को ये भी सिखाया जाता है कि कैद होने पर कैसे बर्ताव करना है और ज्यादा से ज्यादा जानकारी छुपाकर कैसे रखना है।
जहां जेट गिरता है, वो जगह भी उतनी ही अहम होती है, क्योंकि उसमें मौजूद टेक्नोलॉजी, रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और हथियार, दुश्मन के लिए बड़े काम की होती है। अगर सेना वहां नहीं पहुंच पाती, तो कई बार खुद ही एयरस्ट्राइक करके जेट को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है, ताकि कोई सीक्रेट बाहर न जाए।
ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं जहां जेट क्रैश होते ही कुछ ही मिनटों में रेस्क्यू मिशन शुरू हो गया। हाल ही में F-15E Strike Eagle के क्रैश के बाद भी ऐसा ही हुआ, जहां एक पायलट को बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी रही। रात के समय ऑपरेशन करना अमेरिकी सेना के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि उनके पास बेहतर नाइट विजन और तकनीक होती है।
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