Oil Crisis के बीच बड़ी खबर: आखिरकार झुक गया अमेरिका, 11अप्रैल तक दुनिया को मिलेगी राहत

Published : Mar 13, 2026, 09:22 AM IST
US Eases Sanctions on Russian Oil Amid Iran War and Price Surge

सार

Oil Crisis Alert: ईरान युद्ध से तेल की कीमतें $100 के पार जाने पर अमेरिका ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एक अस्थायी कदम उठाया है। उसने देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाज़त दी है, ताकि बाज़ार में तेल की सप्लाई बनी रहे। यह छूट 11 अप्रैल तक सीमित है।

वॉशिंगटन: ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस संकट से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने देशों को रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की इजाज़त दे दी है। यह कदम तब उठाया गया जब अगस्त 2022 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह एक अस्थायी इजाज़त है, ताकि जो रूसी तेल के जहाज समुद्र में फंसे हैं, उन्हें खरीदा जा सके।

क्या ईरान युद्ध ने खड़ा कर दिया है नया वैश्विक ऊर्जा संकट?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष केवल सैन्य तनाव नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यही वजह है कि इस रास्ते के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत हलचल मच गई। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ट्रांसपोर्ट खर्च और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।

 

 

क्या इससे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा होगा?

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस फैसले से रूस को बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि रूस की सरकार को असली कमाई तेल उत्पादन पर लगने वाले टैक्स से होती है। चूंकि यह तेल पहले ही जहाजों पर लोड हो चुका है, इसलिए इसकी बिक्री से रूस को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना कम है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि अचानक सप्लाई संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर न पड़े।

अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की अनुमति क्यों दी?

ट्रेजरी विभाग ने साफ किया है कि यह सिर्फ एक शॉर्ट-टर्म यानी कुछ समय के लिए उठाया गया कदम है, ताकि बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे। यह छूट सिर्फ उसी रूसी कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी, जिन्हें 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किया जा चुका है। इस लाइसेंस की आखिरी तारीख 11 अप्रैल है। स्कॉट बेसेंट ने यह भी दावा किया कि रूस सरकार की मुख्य कमाई तेल निकालने के दौरान लगने वाले टैक्स से होती है। इसलिए, जो तेल पहले से समुद्र में है, उसकी बिक्री से रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह फैसला स्थायी नहीं है। इसे सिर्फ अस्थायी राहत कदम (Short-Term License) के रूप में लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई अचानक कम न हो जाए।

होर्मुज संकट क्यों है अहम?

ईरान युद्ध को अब दूसरा हफ्ता चल रहा है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। यह रास्ता बहुत अहम है क्योंकि दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल यहीं से सप्लाई होता है। इसी वजह से तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध जल्द खत्म हो भी गया, तो भी होर्मुज जलडमरूमध्य के तुरंत खुलने की उम्मीद कम है। इसी गंभीर ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अमेरिका अब रूसी तेल के मामले में नरमी बरतने को तैयार हुआ है।

 

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