Trump Iran Attack को लेकर तनाव बढ़ गया है। पेंटागन ने ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य अभियान के विकल्प तैयार किए हैं। ट्रंप की चेतावनी के बीच चुनाव के बाद हमले का खतरा बढ़ा है। जानें पूरी रिपोर्ट।
US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल गहराते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कभी भी दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान के साथ समझौते का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। फिलहाल पेंटागन ने 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों के बाद हमलों के लिए सैन्य विकल्प तैयार कर लिए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और परमाणु डील (Donald Trump Iran Warning)
अचानक हमले का संकेत: ट्रंप ने रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा कि अमेरिका "कल" ही ईरान पर हमले शुरू कर सकता है या फिर किसी मजबूत समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है।
परमाणु क्षमता रोकने का दावा: उन्होंने जोर देकर कहा कि वे ऐसा समझौता चाहते हैं जो तेहरान को हमेशा के लिए परमाणु हथियार बनाने से रोके।
पिछली कार्रवाई का हवाला: ट्रंप के मुताबिक 2025 में हुए B-2 बॉम्बर स्ट्राइक के बाद अगर सैन्य दबाव ढीला छोड़ दिया जाता, तो ईरान अपनी परमाणु क्षमता दोबारा हासिल कर लेता।
🇺🇸🇮🇷 Trump just admitted another U.S. attack on Iran is STILL ON THE TABLE.
“There's a possibility.”
That's his answer when asked whether American forces could strike Iran again.
With tensions already running high across the Middle East, the president is refusing to rule out another round of bombing.
Writer: Oliver
https://t.co/szNlIRA7s5
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) October 24, 2026
पेंटागन और सेंटकॉम के 2 स्ट्राइक प्लान (US Pentagon Iran Attack Options)
इनलैंड ठिकानों पर निशाना: यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्लान के मुताबिक, इस बार अमेरिका सिर्फ ईरानी तटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को सीधा निशाना बना सकता है।
सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा: यदि इजराइली सेना इसमें शामिल होती है, तो हमले ईरान के ऊर्जा तंत्र, पुलिस स्टेशनों और यूनिवर्सिटी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैल सकते हैं।
मिडटर्म इलेक्शन के बाद एक्शन: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद सैन्य हमलों की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
क्या सैन्य एक्शन से झुकेगा ईरान? (US Military Action Impact)
विशेषज्ञों को संदेह: यूरेशिया ग्रुप और पूर्व रक्षा अधिकारियों का कहना है कि बार-बार के सैन्य हमलों से ईरान अपना रुख बदलने वाला नहीं है।
सप्लाई चैन और ईंधन पर असर: पिछले हमलों से अमेरिका के अपने मिसाइल इंटरसेप्टर कम हुए, मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ी और वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं।
ईरानी नेतृत्व की रणनीति: ईरानी नेता इस लड़ाई को अपनी सत्ता और अस्तित्व से जोड़कर देख रहे हैं, इसलिए वे अमेरिका से रियायतें लेने की कोशिश में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
Iran War: क्या फिर शुरू होगी अमेरिकी बमबारी?
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के बीच भी संभावित नए अभियान को लेकर चर्चा हुई है। ABC News के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाओं ने ईरान पर दोबारा संयुक्त हमलों की योजनाएं तैयार की हैं। हालांकि अंतिम फैसला सिर्फ ट्रंप के हाथ में है।
विशेषज्ञों का सवाल है कि नए हवाई हमले क्या वास्तव में ईरान को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर पाएंगे। पिछले सैन्य अभियान में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को नुकसान पहुंचा, लेकिन उसके सैन्य और राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका।
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