
US Iran Conflict: दुनिया की जीवनरेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शांति की उम्मीदें एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह बिखर गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम समझौता पूरी तरह टूट चुका है। इसके साथ ही, खाड़ी क्षेत्र में एक ऐसे विनाशकारी और पूर्ण युद्ध की वापसी की आशंका गहरा गई है, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख सकती है। मंगलवार को अमेरिकी सेना ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी बंदरगाहों पर दोबारा नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी। यह कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों के जवाब में की गई है। इस नाकाबंदी के साथ ही मध्य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है।
अमेरिका ने अप्रैल में पहली बार नाकाबंदी लागू की थी, जिसे जून में अंतरिम समझौते के बाद हटा लिया गया था। उस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत जारी रखना था। लेकिन होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव और जहाजों पर हमलों के बाद वार्ता पटरी से उतरती दिखाई दे रही है।
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The United States has sabotaged negotiations: burning ships are sinking in the Strait of Hormuz, and Iran is launching massive strikes against US bases and their allies.
▪️Massive strikes have been launched against Bahrain and Kuwait, including an oil storage facility… pic.twitter.com/XJLoGTxdPY— 𝐃𝐚𝐯𝐢𝐝 𝐙 🇷🇺🇮🇪 (@SMO_VZ) July 15, 2026
इस पूरे घटनाक्रम में सोमवार को उस समय एक नया मोड़ आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर कमर्शियल कार्गो शिप पर 20% पासिंग लेवी (गुजरने का शुल्क) लगाने का विवादित प्रस्ताव रखा। ट्रंप का इरादा उन ताकतों को सजा देना था जो समुद्री रास्तों में रुकावट पैदा करती हैं।
तनाव के बीच राहत: हालांकि, नाकाबंदी शुरू होने से ठीक कुछ घंटे पहले ट्रंप ने इस फीस वसूलने के प्लान को छोड़ दिया। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों को बताया कि खाड़ी देशों के राजाओं और अमीर नेताओं ने उन्हें फोन कर फीस के बदले अमेरिका में अरबों-खरबों डॉलर निवेश करने का एक दूसरा विकल्प सुझाया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
नाकाबंदी की घोषणा के साथ ही अमेरिकी मिलिट्री के सेंट्रल कमांड ने ईरान के तटीय ठिकानों पर भीषण हमले शुरू कर दिए। एक संवेदनशील सैन्य अभियान का हवाला देते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि रात भर चले इस स्ट्राइक कैंपेन में ईरान के कोस्टल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकानों, ड्रोन साइट्स और नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाया गया। ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी IRNA के मुताबिक, फारस की खाड़ी पर बसे बुशहर शहर में कम से कम चार ठिकानों पर धमाके हुए। इसके अलावा, अहवाज़ और दक्षिणी पोर्ट सिटी बंदर अब्बास भी अमेरिकी मिसाइलों की गड़गड़ाहट से दहल उठे। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों से ईरान की जहाजों पर हमला करने की क्षमता काफी कमजोर हो जाएगी।
BREAKING: The U.S. and Iran exchanged another night of major military operations across the Gulf.
First, CENTCOM announced a new round of strikes across southern and southwestern Iran, saying U.S. forces targeted capabilities linked to attacks on commercial shipping in the… pic.twitter.com/LPoSXevdbz— The Hormuz Report (@HormuzReport) July 15, 2026
अमेरिकी हमलों से तिलमिलाए ईरान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की। ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका की निगरानी में चल रहे सुरक्षित समुद्री रास्ते को तोड़ते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के हितों को निशाना बनाया। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर भी मिसाइलें दागी गईं। अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम संगठन के अनुसार, 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' नामक दो टैंकरों पर हुए इस हमले में दो बेकसूर नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ईरान का तर्क है कि इन जहाजों ने उनकी बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। कतर ने ईरान के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य कोई आम जलमार्ग नहीं है; युद्ध से पहले दुनिया के कुल कच्चे तेल और नेचुरल गैस का पाँचवा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता था। जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर पहली बार हमला किया था, तब ईरान ने इसी रास्ते को ब्लॉक कर दिया था, जिससे पूरी दुनिया में तेल और फर्टिलाइज़र की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। मंगलवार की सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत एक बार फिर $87 प्रति बैरल के पार चली गई थी। हालांकि, ट्रंप द्वारा टैक्स न वसूलने के फैसले के बाद यह गिरकर $78 पर आ गई। लेकिन अगर नाकाबंदी लंबी खिंचती है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है। फिलहाल, पाकिस्तान के नेतृत्व में एक मध्यस्थता टीम अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है। अब देखना यह है कि क्या डिप्लोमेसी इस बारूद के ढेर को फटने से रोक पाती है या दुनिया एक महायुद्ध की गवाह बनेगी।
‼️🇮🇷🇺🇸The US has disrupted the talks: burning ships are sinking in Hormuz, Iran is launching massive strikes on US bases and those of its allies
▪️Massive strikes have been launched against Bahrain and Kuwait, where an oil storage facility containing jet fuel for aircraft is… pic.twitter.com/VL969vlc2t— Ignorance, the root and stem of all evil (@ivan_8848) July 14, 2026
इस समय पूरे क्षेत्र में 'जैसे को तैसा' वाले हमले शुरू हो चुके हैं। पाकिस्तान के नेतृत्व में एक मध्यस्थता टीम युद्धविराम को फिर से जिंदा करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है, ताकि दोनों देशों को बातचीत की मेज पर वापस लाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, लेबनान और इजराइल के प्रतिनिधिमंडल भी रोम में मुलाकात कर रहे हैं, क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्ध छिड़ने पर हिज़्बुल्लाह के साथ हुआ उनका फ्रेमवर्क समझौता भी खटाई में पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब मध्यस्थों पर टिकी हैं कि क्या वे इस बारूदी संकट को टाल पाते हैं या वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े ब्लैकआउट की तरफ बढ़ जाएगी।
सवाल 1: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जहाजों से 20% पासिंग लेवी (टोल टैक्स) वसूलने के अपने विवादित फैसले पर अड़े रहे?
जवाब: नहीं। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का ऐलान किया था, लेकिन नाकाबंदी शुरू होने से ठीक कुछ घंटे पहले उन्होंने खाड़ी के सहयोगी देशों की अपील पर यह प्लान छोड़ दिया। खाड़ी के "राजाओं और अमीरों" ने उन्हें टोल वसूलने के बजाय यूनाइटेड स्टेट्स में अरबों-खरबों डॉलर निवेश करने का एक दूसरा बड़ा विकल्प सुझाया, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया।
सवाल 2: अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने क्या खूनी पलटवार किया?
जवाब: हमलों से बौखलाए ईरान ने तुरंत बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के हितों को निशाना बनाया। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े तीन बड़े तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दीं। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक, 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' नामक दो टैंकरों पर हुए इस हमले में दो बेकसूर नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इन जहाजों ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।
सवाल 3: इस नए संकट का वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
जवाब: होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल कच्चे तेल और नेचुरल गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है। मंगलवार की शुरुआत में जैसे ही नाकाबंदी और हमलों की खबर आई, इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अचानक $87 प्रति बैरल के पार चली गई। हालांकि, बाद में जब ट्रंप ने टोल टैक्स न वसूलने और निवेश समझौते की घोषणा की, तो कीमतों में थोड़ी नरमी आई और यह गिरकर $78 पर आ गई। लेकिन युद्ध लंबा खिंचने पर यह फिर $120 के पार जा सकती है।
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