US-IRAN DEAL: क्या वाकई परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान, जानें अमेरिका-ईरान डील की 13 बड़ी बातें

Published : Jun 18, 2026, 01:36 PM IST
us-iran interim deal

सार

अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते में क्या-क्या तय हुआ? इस डील पर डोनाल्ड ट्रम्प और मसूद पजशकियान ने कब और कहां हस्ताक्षर किए? होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ेगा? क्या इस समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

US-Iran Interim Deal: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य टकराव को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात फ्रांस में इस समझौते से जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे। ट्रम्प के हस्ताक्षर के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने ईरान से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस समझौते को मंजूरी दी। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 5:30 बजे इस समझौते की आधिकारिक घोषणा की गई और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।

तय समय से पहले हुआ समझौते पर हस्ताक्षर

इस समझौते पर मूल रूप से 19 जून को स्विट्जरलैंड के लूसर्न शहर में हस्ताक्षर होने थे। हालांकि, निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही दोनों देशों ने इस पर सहमति बनाते हुए हस्ताक्षर कर दिए। समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और आगे के लिए स्थायी शांति समझौते का रास्ता तैयार करना है। हालांकि इस समझौते तक पहुंचने के लिए ट्रंप ने अमेरिका का 122 लाख करोड़ का नुकसान कराया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ईरान में सत्ता बदलना चाहते थे, लेकिन वो करने में भी असफल रहे हैं। ऐसे में तमाम एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समझौते के जरिये ट्रंप ने ईरान के सामने एक तरह से सरेंडर ही किया है। 

होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, सैन्य कार्रवाई पर लगेगी रोक

समझौते के तहत ईरान और लेबनान क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों को समाप्त किया जाएगा। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल परिवहन सामान्य हो सकेगा। अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी भी समाप्त करेगा, जिससे समुद्री मार्गों पर आवाजाही बहाल होने की उम्मीद है।

अमेरिका-ईरान ड्राफ्ट समझौते की प्रमुख बातें

  • अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अंतरिम समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं।
  • दोनों देश सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई समाप्त करेंगे।
  • अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
  • 60 दिनों के भीतर स्थायी और अंतिम समझौते के लिए बातचीत पूरी करने की कोशिश की जाएगी।
  • अमेरिका 30 दिनों के भीतर समुद्री नाकेबंदी हटाकर सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करेगा।
  • होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होगी।
  • अमेरिका संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अन्य मंचों पर ईरान से जुड़े प्रतिबंध हटाने की दिशा में काम करेगा।
  • ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • अंतिम समझौते तक ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं करेगा।
  • अमेरिका इस अवधि के दौरान ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
  • ईरानी तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित सेवाओं को विशेष छूट दी जाएगी।
  • ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
  • समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग तंत्र बनाया जाएगा।
  • अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद क्यों ?

ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। वहीं अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।इसी वजह से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

2015 का ईरान परमाणु समझौता क्या था?

साल 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच एक महत्वपूर्ण परमाणु समझौता हुआ था। इसके तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) का स्तर 3.67 प्रतिशत तक सीमित रखने पर सहमति दी थी। 3.67 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का उपयोग मुख्य रूप से परमाणु बिजलीघरों के ईंधन के रूप में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु हथियार बनाने के लिए आमतौर पर 90 प्रतिशत या उससे अधिक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है।

2018 में ट्रम्प के फैसले के बाद क्या बदला?

साल 2018 में डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकाल लिया था। अमेरिका के इस फैसले के बाद ईरान ने धीरे-धीरे यूरेनियम संवर्धन के स्तर को बढ़ाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही उसने 3.67 प्रतिशत की तय सीमा को भी पार कर लिया। इस कदम के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं और बढ़ गईं।

ईरान का यूरेनियम संवर्धन स्तर कितना पहुंच चुका था?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार जून 2025 तक ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास लगभग 400 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का भंडार मौजूद था। हालांकि, यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत संवर्धन से कम है, लेकिन नागरिक उपयोग के लिए जरूरी स्तर से काफी अधिक माना जाता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर बनाए हुए है।

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