
Iran-Israel-US War Latest News: मिडिल-ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। ट्रंप ने ईरान के खारग द्वीप स्थित तेल निर्यात केंद्र पर दोबारा हमले की धमकी दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका वहां 'मजे के लिए भी' फिर हमला कर सकता है। इस बयान के बाद पहले से चल रहा तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस बयान से वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छिड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शनिवार को NBC न्यूज से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के खारग द्वीप स्थित तेल निर्यात केंद्र के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका चाहे तो इस ठिकाने पर फिर से हमला कर सकता है और वह भी कई बार। ट्रंप का यह बयान उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिका सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। अब उनके इस कड़े रुख को शांति प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन फिलहाल बातचीत के मूड में नहीं है।
जंग के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से कहा है कि वे इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि जो देश यहां से तेल खरीदते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मिशन में अमेरिका सहयोग करने के लिए तैयार है।
ट्रंप की चेतावनी के बीच ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद तीन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। ईरान का कहना है कि यह हमला उनके औद्योगिक क्षेत्रों में मारे गए मजदूरों की मौत का बदला है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को एक ईरानी मिसाइल का टुकड़ा इजरायल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से जुड़ी एक रिहायशी इमारत पर गिरा। इस इमारत का इस्तेमाल अमेरिकी दूतावास के कर्मचारी रहने के लिए करते हैं। हालांकि, इस घटना में कितना नुकसान हुआ या कोई घायल हुआ है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर 1444 नागरिक ईरान के बताए जा रहे हैं। शनिवार को इस्फहान में एक फैक्ट्री पर हुए हमले में 15 लोगों की मौत हो गई। बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने की सलाह दी है। साफ है कि ट्रंप और नेतन्याहू फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान भी पूरी ताकत के साथ जवाब दे रहा है।
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