
Trump China Visit Iran Policy: क्या दुनिया एक और विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो दिवसीय चीन दौरे के ठीक बाद जो खबरें वाशिंगटन से निकलकर आ रही हैं, उसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों की सांसें अटका दी हैं। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की शुक्रवार की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को फिर से शुरू करने का एक बेहद आक्रामक ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0' का नाम दिया गया है। तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि किसी भी वक्त मध्य-पूर्व (Middle-East) में बारूद के फटने की गूंज सुनाई दे सकती है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के संकट पर गहन चर्चा करने के बाद, डोनाल्ड ट्रंप जब 'एयर फ़ोर्स वन' विमान से अमेरिका लौट रहे थे, तो उनके तेवर बेहद सख्त थे। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के किसी भी ऐसे शांति प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे जो उनकी शर्तों पर खरा न उतरता हो। अमेरिका की मांग बिल्कुल स्पष्ट है—ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए और दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को तुरंत खोला जाए। चीन रवाना होने से ठीक पहले ट्रंप की यह धमकी उनके इरादे साफ करती है: "या तो वे कोई समझौता करेंगे, या फिर वे पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे।"
सस्पेंस इस बात को लेकर सबसे गहरा है कि यह हमला कब होगा? मध्य-पूर्व के दो शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया है कि अमेरिका और इज़राइल की सेनाएं अगले सप्ताह से ही ईरान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू करने की गहन तैयारियों में जुट गई हैं। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह कांग्रेस के सामने गवाही देते हुए बेहद सस्पेंस भरे लहजे में सांसदों से कहा, "यदि आवश्यक हुआ, तो हमारे पास स्थिति को और आगे बढ़ाने (हमले तेज करने) की पूरी योजना मौजूद है।" यानी पेंटागन सिर्फ आदेश का इंतजार कर रहा है।
अमेरिकी खुफिया और सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अगर ट्रंप युद्ध का बिगुल फूंकते हैं, तो उनके सामने तीन बड़े रास्ते हैं, जिनमें से हर एक रास्ता तबाही की ओर जाता है:
इस पूरे कूटनीतिक ड्रामे के बीच ट्रंप के सामने घरेलू मोर्चे पर भी एक बड़ी चुनौती है। नवंबर में अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव होने वाले हैं। अमेरिकी जनता इस युद्ध से थक चुकी है क्योंकि इसकी भारी आर्थिक कीमत आम अमेरिकियों को अपनी जेब से चुकानी पड़ रही है। वैश्विक सहयोगी देश भी ट्रंप पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वे कोई बीच का रास्ता निकालें ताकि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' खुल सके और ट्रंप युद्ध के बजाय कूटनीति से अपनी जीत का जश्न मना सकें।
दूसरी तरफ, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट कर अमेरिका को खुली चुनौती दी है। उन्होंने लिखा, "हमारी सेना किसी भी हमले का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है... वे हैरान रह जाएँगे।" खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले संघर्ष के बाद ईरान ने चोरी-छिपे अपने मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा कर लिया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के किनारे स्थित 33 में से 30 मिसाइल साइटों पर ईरान फिर से काबिज हो चुका है, जहाँ से वह दुनिया के कमर्शियल जहाजों को पल भर में राख करने की ताकत रखता है। अब पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन पर टिकी हैं कि क्या अगले कुछ घंटों में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0' का काउंटडाउन शुरू हो जाएगा?
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