न्यूक्लियर साइट के बदले $6 बिलियन? स्विट्ज़रलैंड की सीक्रेट मीटिंग में क्या चाहता है अमेरिका?

Published : Jun 21, 2026, 12:49 PM IST
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सार

स्विट्जरलैंड में US-ईरान न्यूक्लियर वार्ता के बीच $6 बिलियन डील, UN इंस्पेक्टर एक्सेस और होर्मुज संकट ने बढ़ाया सस्पेंस। क्या मध्य पूर्व में शांति आएगी या नया टकराव शुरू होगा?

US Iran Nuclear Talks: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी भीषण तनाव के बीच, स्विट्जरलैंड का खूबसूरत 'बर्गेनस्टॉक स्की रिसॉर्ट' इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक सस्पेंस का गवाह बनने जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान का एक बेहद ताकतवर डेलीगेशन इस समय आमने-सामने हैं। इस महा-वार्ता का मुख्य एजेंडा है—ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और लेबनान में मची तबाही को रोकना। 60 दिनों की इस सीज़फायर वार्ता को सफल बनाने के लिए परदे के पीछे अरबों डॉलर का खेल और न्यूक्लियर साइट्स तक पहुंच का एक ऐसा सौदा बुना जा रहा है, जो पूरी दुनिया की भू-राजनीति को बदल सकता है।

$6 बिलियन का वो गुप्त खाता: अमेरिका की पहली और सबसे बड़ी शर्त

ग्लोबल मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' ने दो रीजनल सोर्स के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। वॉशिंगटन इस पहले राउंड की बातचीत में ईरान के सामने एक सख्त शर्त रख चुका है। अमेरिका चाहता है कि इस वार्ता का अंत ईरान द्वारा संयुक्त राष्ट्र (UN) के इंस्पेक्टरों को अपनी उन न्यूक्लियर फैसिलिटीज का दौरा करने की इजाजत देने के साथ हो, जिन पर पहले अमेरिका और इज़राइल ने कथित तौर पर बमबारी की थी। जून 2025 के बाद से वहां कोई इंस्पेक्शन नहीं हुआ है। अब सस्पेंस इस बात को लेकर है कि बदले में अमेरिका ईरान को क्या दे रहा है? रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान UN इंस्पेक्टरों को अपनी न्यूक्लियर साइट्स का एक्सेस देता है, तो अमेरिका कतर के बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़े ईरान के फंड का एक बड़ा हिस्सा रिलीज कर देगा। इसकी शुरुआत $6 बिलियन (लगभग 6 अरब डॉलर) के अकाउंट से होगी, जिसका इस्तेमाल ईरान केवल मानवीय जरूरतों और भोजन-दवाइयों की खरीदारी के लिए कर पाएगा।

पाकिस्तान की एंट्री और ट्रंप का 'टोल टैक्स' अल्टीमेटम: परदे के पीछे का खेल

इस महा-वार्ता को सफल बनाने के लिए केवल अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि मध्यस्थ (मीडिएटर) के तौर पर पाकिस्तान भी पूरी ताकत लगा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर खुद इस गुप्त बातचीत का हिस्सा बनने बर्गेनस्टॉक पहुंचे हैं। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बातचीत के बीच 'ट्रुथ सोशल' पर एक ऐसा पोस्ट कर दिया है जिसने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि इस 60 दिनों की बातचीत के दौरान तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर यह डील फेल होती है, तो अमेरिका मिडल ईस्ट के देशों को सुरक्षा देने यानी 'गार्जियन एंजेल' की भूमिका निभाने के बदले पिछली, वर्तमान और भविष्य की पूरी लागत वसूलने के लिए होर्मुज में भारी-भरकम 'US टोल टैक्स' लगा देगा।

'बीबी' का पॉलिटिकल प्रेशर: क्या इज़राइल बिगाड़ेगा ट्रंप और वेंस का खेल?

इस पूरी बातचीत के सफल होने पर सबसे बड़ा संकट और सस्पेंस इज़राइल की तरफ से मंडरा रहा है। अमेरिकी इंटेलिजेंस असेसमेंट (खुफिया रिपोर्ट) ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (जिन्हें बीबी भी कहा जाता है) पर हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन जारी रखने का भारी घरेलू राजनीतिक दबाव है। उनकी कुर्सी इस बात पर टिकी है कि लेबनान में इज़राइली सेना मौजूद रहे। अमेरिकी अधिकारियों को गहरा शक है कि नेतन्याहू अपनी राजनीतिक हैसियत बचाने के लिए जानबूझकर इस US-ईरान बातचीत में रुकावट डालने की कोशिश कर सकते हैं। लेबनान में लगातार हो रहे इज़राइली हमले और ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई के रूप में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकियां इस बात का सुबूत हैं कि यह शांति वार्ता किसी भी वक्त एक नई महाजंग में तब्दील हो सकती है। स्विट्जरलैंड में जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच चल रही यह बातचीत सफल होगी या नहीं, इस पर पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं।

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