क्या खत्म होने वाला है दशकों पुराना तनाव? अमेरिका-ईरान समझौते की 14 शर्तें लीक!

Published : Jun 12, 2026, 03:40 PM IST
us iran peace deal draft conditions revealed 2026

सार

America Iran Agreement 2026: अमेरिका और ईरान के प्रस्तावित शांति समझौते में कौन-कौन सी 14 प्रमुख शर्तें शामिल हैं? क्या इस समझौते के तहत ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध और फ्रीज किए गए फंड वास्तव में हटाए जाएंगे? लेबनान और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अमेरिका-ईरान शांति समझौते की सफलता को कैसे प्रभावित कर सकती है?

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते का एक प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें युद्ध समाप्त करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं।

हालांकि अभी इस ड्राफ्ट की न तो अमेरिका ने और न ही ईरान ने आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन इसके सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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14 बिंदुओं वाले मसौदे में युद्ध समाप्त करने का प्रस्ताव

ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में कुल 14 प्रमुख शर्तें शामिल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम का है। इस प्रस्ताव में लेबनान में जारी संघर्ष को भी शामिल किया गया है, जहां लंबे समय से तनाव बना हुआ है।

ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को 30 दिनों के भीतर दोबारा खोला जाएगा। हालांकि इसके संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी ईरान के नियंत्रण में रहने का प्रस्ताव रखा गया है।

अमेरिका से सैन्य मौजूदगी कम करने की मांग

मसौदे के अनुसार, अमेरिका को ईरान की संप्रभुता का सम्मान करना होगा और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना होगा। इसके अलावा अमेरिका को 30 दिनों के भीतर ईरान के आसपास लागू नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने की भी शर्त रखी गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह जानकारी ईरानी वार्ता टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि अंतिम निर्णय के लिए अभी ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी आवश्यक बताई जा रही है।

तेल प्रतिबंधों में राहत और 300 अरब डॉलर पुनर्निर्माण योजना

समझौते के मसौदे में अमेरिकी तेल प्रतिबंधों को हटाने या अस्थायी रूप से निलंबित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, क्योंकि वर्षों से लगे प्रतिबंधों ने उसके तेल निर्यात को प्रभावित किया है। इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना तैयार करने की बात कही गई है। यह राशि युद्ध और प्रतिबंधों से प्रभावित क्षेत्रों के विकास में खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।

परमाणु हथियार नहीं बनाने का दोहराया वादा

मसौदे के अनुसार, ईरान ने एक बार फिर यह आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके बदले अमेरिका से अपेक्षा की गई है कि वह बातचीत की अवधि के दौरान क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा और ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत वार्ता जारी रखने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

24 अरब डॉलर का फ्रीज फंड जारी करने की मांग

ड्राफ्ट में ईरान की विदेशों में जमी लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम वार्ता तभी शुरू होगी जब ईरान के फ्रीज किए गए फंड का कम से कम आधा हिस्सा जारी कर दिया जाएगा, तेल प्रतिबंधों में राहत मिलेगी और नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाएगी।

मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों पर चुप्पी

इस मसौदे की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को उसके समर्थन जैसे विवादास्पद मुद्दों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इन्हें बातचीत के दायरे से बाहर रखा गया है।

लेबनान की स्थिति समझौते की सफलता तय कर सकती है

दूसरी तरफ इजराइल ने संकेत दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। अप्रैल में घोषित युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते की सफलता काफी हद तक लेबनान की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। हिज्बुल्लाह लगातार मांग कर रहा है कि इजराइली सेना लेबनान से पूरी तरह हटे, जबकि इजराइल अपने सुरक्षा हितों का हवाला दे रहा है।

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