
Donald Trump Iran Deal: मध्य पूर्व एक बार फिर उस बारूद के ढेर पर खड़ा है, जहाँ कूटनीति की एक छोटी सी चिंगारी या तो शांति का रास्ता दिखाएगी या फिर पूरी दुनिया को एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में झोंक देगी। अमेरिका और ईरान के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और 60 दिनों के संघर्ष विराम को लेकर पर्दे के पीछे एक बड़ी बिसात बिछाई जा रही है। लेकिन इस गुप्त समझौते की भनक लगते ही वैश्विक बाज़ारों और सैन्य गलियारों में सस्पेंस गहरा गया है। सवाल यह है कि क्या यह सचमुच शांति की सुबह है या किसी बड़े महायुद्ध से पहले का सन्नाटा?
सूत्रों की मानें तो वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक बेहद गोपनीय समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। इस डील का सबसे संवेदनशील हिस्सा है दुनिया की लाइफलाइन-होरमुज़ जलडमरूमध्य। प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी में ढील देगा और ईरान के तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को आंशिक रूप से हटाएगा। लेकिन इसके बदले ईरान को जो करना है, उसने रणनीतिकारों की सांसें अटका दी हैं। ईरान को महज 30 दिनों के भीतर इस समुद्री मार्ग में बिछाई गई अपनी घातक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को साफ करना होगा। यह वही रास्ता है जहाँ से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। अगर यहाँ एक भी चूक हुई, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।
The US and Iran reached an agreement to extend their ceasefire and lift restrictions on shipping through the Strait of Hormuz, though US President Trump has yet to approve it https://t.co/UhuD2YNKYk pic.twitter.com/AAMHLYzSyi
— Reuters (@Reuters) May 29, 2026
इस पूरी बातचीत के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का रुख बना हुआ है। व्हाइट हाउस के भीतर से आ रही खबरें बताती हैं कि ट्रंप इस शुरुआती डील से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। वह किसी भी ऐसे समझौते पर दस्तखत करने के मूड में नहीं हैं जो 2015 की परमाणु डील (JCPOA) से ज्यादा सख्त और आक्रामक न दिखे। उधर तेहरान ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ईरानी कमांडरों का साफ कहना है कि जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटते, तब तक कागज़ के इन टुकड़ों की कोई कीमत नहीं है। दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों की यह तनातनी इस समझौते को बेहद नाजुक मोड़ पर ले आई है।
सबसे चौंकाने वाला विरोधाभास ज़मीन पर देखने को मिल रहा है। एक तरफ कूटनीतिज्ञ न्यू यॉर्क और जिनेवा में हाथ मिला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बंदर अब्बास के पास ईरान के पांच खोजी ड्रोन्स को मार गिराया है। इसके जवाब में जो हुआ, उसने मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया।
US and Iran reach 'TENTATIVE deal', Trump yet to sign off on it — CNN
— Lifting of US blockade on Strait of Hormuz
— Launch 60-day talks period on Iran’s nuclear program
'Any advancements could be UPENDED if Trump decides to withhold approval'
VIDEO: Trump on Wednesday… pic.twitter.com/wvi1UwlNcw— Jack Straw (@JackStr42679640) May 29, 2026
कुवैत के आसमान में अचानक सायरन गूंज उठे जब वहां एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुलेआम इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने उस अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है जहाँ से उनके ड्रोन्स पर हमले हुए थे। कुवैत ने इसे "आपराधिक ईरानी कार्रवाई" करार दिया है, जिसने इस तथाकथित शांति वार्ता की धज्जियाँ उड़ा दी हैं।
इस खूनी लुकाछिपी ने यह साबित कर दिया है कि दोनों शक्तियों के बीच भरोसे का पैमाना शून्य पर है। होरमुज़ जलडमरूमध्य इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर है जहाँ किसी भी एक सैनिक की उंगली अगर ट्रिगर पर कांपी, तो वह तीसरे विश्व युद्ध का बटन दबा देगी। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यह 60 दिनों की मोहलत तबाही को टाल पाएगी, या फिर यह आने वाले भयानक तूफान का सिर्फ एक खामोश आगाज़ है?
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