
विदेश से लौटे हैं, यह तमगा पाने का सपना कई लोग देखते हैं। खासकर अमेरिका जाने का क्रेज तो भारत में बहुत ज़्यादा है। मां-बाप भी बड़े गर्व से बताते हैं कि उनका बेटा, बेटी या दामाद अमेरिका से आया है। इसी वजह से अमेरिका जाने वालों, खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तादाद बहुत ज़्यादा है। अमेरिका में 50 लाख से भी ज़्यादा भारतीय रहते हैं। इनमें से ज़्यादातर लोग H-1B वीज़ा पर काम करने गए हैं। लेकिन अब इन लोगों पर एक बड़ा संकट आ गया है। अमेरिका के टेक सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां जा रही हैं, जिसने वहां बसे हज़ारों भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की ज़िंदगी को पटरी से उतार दिया है। सालों से काम कर रहे, घर खरीद चुके और परिवार के साथ बस चुके लोगों की ज़िंदगी कंपनी के एक ईमेल से बदल रही है।
Layoffs.fyi नाम की डेटा साइट के मुताबिक, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1 लाख 10 हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी अपनी नौकरी खो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी कर्मचारियों की है, खासकर भारतीयों की, जो H-1B वीज़ा प्रोग्राम का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाते हैं। वित्त वर्ष 2025 के लिए अमेरिकी सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि सबसे ज़्यादा H-1B वीज़ा भारतीयों के ही अप्रूव हुए हैं।
Meta, Amazon और LinkedIn जैसी बड़ी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन की वजह से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकाल रही हैं। भारतीय पेशेवरों के लिए नौकरी जाने का मतलब सिर्फ़ पैसों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह देश छोड़ने की उलटी गिनती की शुरुआत भी है।
अमेरिका में काम करने वाले ज़्यादातर भारतीय टेक पेशेवर H-1B वीज़ा पर हैं, जो सीधे उनकी कंपनी से जुड़ा होता है। नौकरी जाने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत, उन्हें अपना वीज़ा ट्रांसफर कराने के लिए दूसरी कंपनी खोजने को बहुत कम समय मिलता है। अगर वे इस समय में नया स्पॉन्सर नहीं ढूंढ पाते, तो उन्हें कानूनी तौर पर अमेरिका छोड़ना पड़ता है। इसका असर उनकी पूरी ज़िंदगी पर पड़ता है, क्योंकि यह सिर्फ़ नौकरी ढूंढने की बात नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, हेल्थकेयर और परिवार के भविष्य से भी जुड़ा है।
US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) के नियमों के मुताबिक, नौकरी से निकाले गए H-1B कर्मचारियों को आम तौर पर 60 दिनों का 'ग्रेस पीरियड' मिलता है, या जब तक उनका I-94 स्टेटस वैध है, जो भी पहले हो। यह 60 दिन का ग्रेस पीरियड कर्मचारी के काम के आखिरी दिन से शुरू होता है, न कि आखिरी सैलरी मिलने वाले दिन से। इस दौरान, वे नई नौकरी ढूंढ सकते हैं, किसी दूसरे वीज़ा के लिए अप्लाई कर सकते हैं, या फिर देश छोड़ने की तैयारी कर सकते हैं। उनके पास बस यही रास्ते होते हैं।
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