
मध्य-पूर्व में हालात एक बार फिर नाजुक मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से आई एक खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका के झंडे वाले दो व्यापारिक जहाज इस संवेदनशील जलमार्ग के दक्षिणी हिस्से में फंस गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी जलक्षेत्र में स्थित उथले और पथरीले इलाके में ये दोनों जहाज फंस गए हैं। बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र ओमान के तट के पास आता है, जहां समुद्री मार्ग बेहद जटिल और जोखिम भरा है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जहाज न तो आगे बढ़ पा रहे हैं और न ही पीछे लौटने की स्थिति में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज का यह दक्षिणी हिस्सा किसी सुरक्षित समुद्री गलियारे की तरह काम नहीं करता, जिससे यहां नेविगेशन बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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इस घटनाक्रम पर यूएस सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि अमेरिका के झंडे वाले दो व्यापारिक जहाज सोमवार को सुरक्षित रूप से इस स्ट्रेट से गुजरे थे। हालांकि, ईरान की प्रमुख सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे गलत बताया है। दोनों पक्षों के दावों में अंतर ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि यह सिर्फ समुद्री दुर्घटना नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश का हिस्सा भी माना जा रहा है।
इस खबर पर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च करने की घोषणा की थी, जिसे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की नई रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं इस प्रोजेक्ट के प्रभाव और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। जवाब में तेहरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का कदम उठाया। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
हालांकि 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से संघर्ष-विराम लागू किया गया था, लेकिन यह समझौता स्थायी साबित नहीं हो सका। इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आई। बाद में ट्रंप प्रशासन ने इस सीजफायर को बिना किसी तय समयसीमा के बढ़ा दिया, लेकिन जमीन पर हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते दिख रहे हैं।
सोमवार को ईरान द्वारा UAE पर किए गए हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पूर्ण युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की घटनाएं जारी रहीं, तो खाड़ी क्षेत्र में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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