
Trump Tariff Supreme Court Ruling: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के IEEPA टैरिफ को रद्द कर दिया। कोर्ट ने रिफंड की प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दी, जिससे अब अमेरिका में टैरिफ रिफंड की लंबी लड़ाई शुरू हो गई है। जनवरी 2025 से दिसंबर तक लगभग $133.5 बिलियन टैरिफ गैर-कानूनी माने जाने के कारण लौटाने पड़ सकते हैं।
एनालिस्ट के मुताबिक, रिफंड अपने आप नहीं आएगा। जो भी इंपोर्टर अपना पैसा वापस चाहता है, उसे अलग से कोर्ट में केस करना होगा। इस प्रक्रिया में पहले ही 1,000+ कॉर्पोरेट कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। ट्रंप ने कहा कि कोर्ट लड़ाई अगले पांच साल तक चल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने 10% नया टैरिफ लागू करने का वादा किया। यह 1974 के ट्रेड एक्ट सेक्शन 122 के तहत 150 दिनों तक लागू रहेगा। यह कदम अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी को टिकाऊ बनाने और वैश्विक व्यापार में दबाव बनाने के लिए लिया गया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि Section 301 के तहत गलत ट्रेड प्रैक्टिस की जांच शुरू होगी। इससे लंबी अवधि में अधिक स्थायी और मजबूत टैरिफ लगाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका की वैश्विक ट्रेड रणनीति में एक नया चैप्टर खोलता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन व्यापारिक पार्टनर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा सकता है जिन्होंने पहले ही डील की हैं। जिन देशों ने डील फाइनल नहीं की, उनके पास अब अधिक लेवरेज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टनर्स अपने कमिटमेंट पर फिर से विचार कर सकते हैं।
येल यूनिवर्सिटी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद कंज्यूमर्स को 9.1% एवरेज इफेक्टिव टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह पिछले साल के 16.9% से कम है, लेकिन 2025 के बाद अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि टैरिफ पॉलिसी में बदलाव से कुल मिलाकर टैरिफ रेट कम और ज्यादा प्रेडिक्टेबल हो सकता है।
ट्रंप का कहना है कि नए टैरिफ और Section 301 जांच से अमेरिका की अर्थव्यवस्था और व्यापार दबाव दोनों मजबूत रहेंगे। हालांकि, यह कदम वैश्विक व्यापार में नई अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव ला सकता है।
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