
लखनऊ। उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस के पहले दिन सोमवार को होटल द सेंट्रम में हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई अब केवल तकनीकी नवाचार नहीं रह गया है, बल्कि यह जनकल्याण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और समावेशी विकास का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
यह सत्र प्राथमिकता वाले एआई मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने, नीति से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक समाधान तैयार करने का एक प्रभावी मंच बना। इसमें सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर चुनौतियों की पहचान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने और ठोस परिणामों पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हेल्थ सेक्टर में तकनीक और एआई के उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम योगी की स्पष्ट मंशा है कि एआई के जरिए मातृ एवं नवजात देखभाल को मजबूत किया जाए, बीमारियों की समय पर पहचान हो, इलाज अधिक सटीक बने और हेल्थ रिसर्च को नई दिशा मिले। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित समाधानों के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है।
सत्र में इंडिया एआई मिशन की सीओओ कविता भाटिया ने एआई के क्षेत्र में जनभागीदारी की अहम भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और समृद्ध, संरचित (रिच स्ट्रक्चर्ड) डाटा का प्रभावी उपयोग उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के माध्यम से उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल एआई पावर हाउस के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां नवाचार, निवेश और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
इंडिया एआई मिशन के जनरल मैनेजर स्वदीप सिंह ने हेल्थ सेक्टर में एआई के लिए डाटा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित तरीके से स्टोर किए गए डाटा का सही उपयोग भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज और गहन रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक प्रकार के डाटा पर निर्भर रहने के बजाय, विविध एआई-आधारित डाटा सॉल्यूशंस पर काम करना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी, सटीक और भरोसेमंद बन सकें।
फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई मिशन के जीएम कार्तिक सूरी ने कहा कि हेल्थ सेक्टर में एआई के सफल और सुरक्षित उपयोग के लिए फ्यूचर-रेडी वर्कफोर्स तैयार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि देशभर में कई डाटा लैब स्थापित की जा चुकी हैं और लगातार नई एआई आधारित डाटा लैब विकसित की जा रही हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता को एआई आधारित तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि एआई सिस्टम सुरक्षित, भरोसेमंद और समाज के लिए उपयोगी बन सके।
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