सख्त प्रशासक से संवेदनशील संरक्षक तक, बच्चों के बीच दिखता CM योगी का बालप्रेम

Published : Jan 20, 2026, 09:48 AM IST
CM Yogi Adityanath janta darshan connection with chidren

सार

सख्त प्रशासन और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों, दिव्यांगों और जरूरतमंदों के बीच अपने स्नेह, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णयों से भरोसे का मजबूत आधार बनाते हैं।

लखनऊ। अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सख्त अनुशासन और निर्णायक प्रशासन के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बच्चों के बीच बिल्कुल अलग रूप में नजर आते हैं। उनकी स्नेहिल मुस्कान और आत्मीय व्यवहार बच्चों को सहज बना देता है। बच्चे बेझिझक अपनी बात कहते हैं, अपनी पसंद जाहिर करते हैं और मुख्यमंत्री से घुल-मिल जाते हैं। बच्चों के प्रति यह अपनापन मुख्यमंत्री योगी के कोमल, मानवीय और सर्वसुलभ व्यक्तित्व को सामने लाता है। यही कारण है कि समाज के हर वर्ग में उनके प्रति भरोसा और जुड़ाव लगातार मजबूत हुआ है।

सख्त छवि के पीछे छिपा मानवीय और संवेदनशील पक्ष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों, जरूरतमंदों और कमजोर वर्गों से गहरा जुड़ाव उनकी सख्त छवि के मानवीय पहलू को उजागर करता है। यह भावनात्मक रिश्ता प्रदेश की 25 करोड़ जनता में उनके प्रति विश्वास को और मजबूत करता है। उनकी संवेदनशीलता उन्हें समाज के हर तबके से जोड़ती है।

जनता दर्शन और मंदिर परिसरों में बच्चों से आत्मीय संवाद

सोमवार के ‘जनता दर्शन’, मकर संक्रांति, गोरखनाथ मंदिर और अन्य अवसरों पर मुख्यमंत्री का बच्चों से संवाद अक्सर देखने को मिलता है। गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और जवाब सुनकर ठहाका लगाना, मुख्यमंत्री के बालप्रेम का एक मासूम और यादगार क्षण था।

हालांकि योगी आदित्यनाथ अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बुलडोजर एक्शन और कड़े प्रशासन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बच्चों से संवाद, उनके भविष्य को लेकर संवेदनशील फैसले और त्वरित समाधान उनकी दयालु संरक्षक वाली छवि को भी सामने लाते हैं।

अनन्या से संवाद से लेकर वायरल वीडियो तक

गोरखपुर का वायरल वीडियो हो या जनता दर्शन में दो साल की अनन्या से बातचीत—ये कोई एक-दो घटनाएं नहीं हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं जो मुख्यमंत्री के बच्चों के प्रति स्नेह और संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

मेजर की बेटी का मामला: 24 घंटे में मिला न्याय

31 दिसंबर को एक मेजर की बेटी अंजना भट्ट मुख्यमंत्री से अपनी समस्या लेकर मिली थीं। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे के भीतर, यानी साल के पहले ही दिन, समस्या का समाधान कराया। न सिर्फ मकान कब्जा मुक्त कराया गया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर और तत्काल गिरफ्तारी भी हुई। यह उदाहरण बताता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में कोई देरी नहीं करते।

मूक-बधिर खुशी गुप्ता की कहानी बनी प्रेरणा

कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की मुख्यमंत्री से मिलने की जिद जब सामने आई, तो उन्होंने उसे बुलाया। मुख्यमंत्री ने उसके बनाए चित्र स्वीकार किए और उसके सुरक्षित व शिक्षित भविष्य का भरोसा दिया। यह अनुभव खुशी और उसके परिवार के लिए जीवनभर की पूंजी बन गया।

बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता: मायरा, वाची और पंखुड़ी

‘जनता दर्शन’ के माध्यम से कई बच्चों का भविष्य संवरा-

  • कानपुर की मायरा, जिसने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, उसका तत्काल स्कूल में दाखिला कराया गया।
  • मुरादाबाद की वाची, जो पढ़ना चाहती थी, उसे भी विद्यालय में प्रवेश मिला।
  • गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराकर उसे फिर से स्कूल भेजा गया।

ये फैसले मुख्यमंत्री की बाल कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

बूढ़ी मां के दर्द पर तुरंत कार्रवाई

29 सितंबर के जनता दर्शन में कानपुर के रायपुरवा से आई एक बूढ़ी मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर पहुंची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका दर्द सुनकर द्रवित हो गए और तुरंत एंबुलेंस से बेटे को कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाया। यह संवेदनशीलता उन्हें समाज से और जोड़ती है।

दिव्यांगों के लिए ‘रोशनी’ और पेंशन की त्वरित व्यवस्था

17 अप्रैल के जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने चंदौली के दो दिव्यांगों को अपने हाथों से इलेक्ट्रॉनिक सेंसरयुक्त स्टिक प्रदान की और उसका उपयोग भी सिखाया। एक अन्य दिव्यांग की समस्या सुनकर मौके पर ही केवाईसी कराकर पेंशन योजना का लाभ सुनिश्चित कराया गया।

संवेदनशील मुख्यमंत्री, भरोसे का प्रतीक

ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिर्फ सख्त प्रशासक ही नहीं, बल्कि बच्चों, दिव्यांगों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों के संवेदनशील संरक्षक भी हैं। उनका यही मानवीय पक्ष समाज में विश्वास और जुड़ाव को और गहरा करता है।

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