
लखनऊ। हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल राज्य के गठन की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह सोचने का अवसर भी देता है कि उत्तर प्रदेश आज कहां खड़ा है और आगे किस दिशा में बढ़ रहा है। एक समय था जब उत्तर प्रदेश को देश के ‘बीमारू राज्यों’ में गिना जाता था। कमजोर कानून-व्यवस्था, खराब बुनियादी ढांचा, बेरोजगारी, पलायन और निवेश की कमी इसकी पहचान बन चुकी थी। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश की तस्वीर और दिशा, दोनों में ठोस बदलाव देखने को मिले।
जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था करीब 12.88 लाख करोड़ रुपये की थी। अपने लगभग पौने नौ वर्षों के कार्यकाल में सरकार ने इसे बढ़ाकर करीब 31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है। अब सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029–30 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
योगी सरकार ने सत्ता में आते ही कानून-व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता बनाया। संगठित अपराध, माफिया राज और दंगों की राजनीति ने लंबे समय तक प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। पुलिस सुधार, माफिया पर सख्त कार्रवाई और अवैध संपत्तियों की जब्ती से अपराधियों का मनोबल टूटा और आम जनता व निवेशकों का भरोसा लौटा।
योगी सरकार के कार्यकाल में बड़े दंगों पर प्रभावी नियंत्रण रहा और आपराधिक घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसका असर सामाजिक माहौल पर भी दिखा। लोग देर रात तक काम और यात्रा करने में खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करने लगे। महिलाओं की सुरक्षा के मामले में भी उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य बनाने में कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर भी बड़ी वजह रहा था। टूटी सड़कें, अधूरी परियोजनाएं और खराब कनेक्टिविटी ने विकास को रोका। योगी सरकार ने इस दिशा में आक्रामक रणनीति अपनाई और प्रदेश में एक्सप्रेस-वे का मजबूत नेटवर्क तैयार किया।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं ने यात्रा को आसान बनाया। इसके साथ ही एयरपोर्ट के विस्तार और नए हवाई अड्डों की योजनाओं ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी।
कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का सीधा असर निवेश पर पड़ा। योगी सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के जरिए उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा।
डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, डेटा सेंटर, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्ताव आए। डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना से लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा और अलीगढ़ जैसे शहर रक्षा उत्पादन के केंद्र बन रहे हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर बढ़े हैं।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार कृषि है। ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली भी पहले इसकी कमजोर पहचान का कारण रही। योगी सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं, फसल बीमा और गन्ना किसानों के भुगतान पर खास ध्यान दिया।
गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिलने से गांवों में नकदी प्रवाह बढ़ा। डेयरी, मत्स्य पालन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देकर कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए गए।
योगी सरकार ने केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया। आवास योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचा, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आई। इस पारदर्शी और जवाबदेह शासन शैली ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संस्कृति में बड़ा बदलाव किया।
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