
आगरा। ताजनगरी आगरा एक बार फिर छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं से गूंजने जा रही है। 19 फरवरी को उनकी 396वीं जयंती के अवसर पर आगरा किले में लगातार चौथे वर्ष भव्य ‘शिव जयंती उत्सव’ आयोजित किया जा रहा है। योगी सरकार द्वारा राष्ट्र नायकों को सम्मान देने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कार्यक्रम को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी है।
आयोजक संस्था ‘अजिंक्य देवगिरी प्रतिष्ठान’ के अध्यक्ष विनोद पाटिल के अनुसार, आगरा किला शिवाजी महाराज के स्वाभिमान और साहस का बड़ा साक्षी है। इसी किले में 1666 में औरंगजेब ने उन्हें नजरबंद किया था। लेकिन शिवाजी महाराज ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से वहां से निकलकर स्वराज्य को और मजबूत किया। पिछले तीन वर्षों से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों के सहयोग तथा पुरातत्व विभाग की अनुमति से यह उत्सव मनाया जा रहा है। इस बार भी कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ आयोजित होगा और आगरा किला भगवा रंग में सजा नजर आएगा।
आगरा किले में शाम छह बजे से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। महाराष्ट्र सरकार का सांस्कृतिक विभाग इस आयोजन का सहसंयोजक है। उत्सव का मुख्य आकर्षण शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित भव्य लेजर शो होगा। इसके साथ ही नाटिका, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी, जो उनके पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को दर्शाएंगी।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्र नायकों की विरासत को सहेजने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सितंबर 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि हमारे नायक शिवाजी हैं। इसी क्रम में ताजमहल के पूर्वी गेट के पास बन रहे ‘मुगल म्यूजियम’ का नाम बदलकर ‘छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम’ कर दिया गया। यह कदम राष्ट्रवाद और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
करीब छह एकड़ क्षेत्र में 141 करोड़ रुपये की लागत से यह आधुनिक म्यूजियम तैयार किया जा रहा है। इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस म्यूजियम में आधुनिक तकनीक और इंटरैक्टिव गैलरी के माध्यम से शिवाजी महाराज के जीवन, उनके संघर्ष और आगरा किले से साहसिक तरीके से निकलने की घटना को दर्शाया जाएगा।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार मिलकर ‘कोठी मीना बाजार’ को भी एक स्मारक के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही हैं। यहीं पर 1666 में शिवाजी महाराज को नजरबंद रखा गया था। आगरा किले के सामने पहले से ही शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान की याद दिलाती है।
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