UP Religious Tourism: 122 करोड़ श्रद्धालु के साथ टेंपल इकॉनमी मॉडल से अयोध्या-काशी में आर्थिक विकास की नई रफ्तार

Published : Feb 18, 2026, 09:11 PM IST
UP Religious Tourism Temple Economy model

सार

उत्तर प्रदेश में टेंपल इकॉनमी मॉडल के तहत धार्मिक स्थलों के विकास से 122 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। अयोध्या, काशी और प्रयागराज सहित कई शहरों में होटल, एमएसएमई, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिला, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन केवल आस्था तक सीमित नहीं रहा है। यह अब राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला मजबूत मॉडल बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने दिखाया है कि अगर धार्मिक स्थलों का योजनाबद्ध विकास किया जाए, तो आस्था, पर्यटन और स्थानीय कारोबार—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने प्राचीन मंदिरों और तीर्थ स्थलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाकर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा है। इससे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिला है।

Temple Economy Model: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से बढ़ा धार्मिक पर्यटन

पहले उपेक्षित रहे कई धार्मिक स्थलों पर अब व्यापक विकास कार्य हुए हैं। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण, पार्किंग की बेहतर व्यवस्था, साफ-सफाई, रोशनी, सुरक्षा और आधुनिक यात्री सुविधाएं—इन सबने श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष राज्य में 122 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह आंकड़ा प्रशासनिक क्षमता और बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है। धार्मिक पर्यटन अब राज्य की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

Ayodhya, Kashi, Prayagraj: प्रमुख धार्मिक शहरों का आर्थिक परिवर्तन

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर का विकास और भव्य अवसंरचना निर्माण ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई है। वाराणसी में काशी क्षेत्र के विकास, घाटों के पुनरुद्धार और बेहतर सुविधाओं ने पर्यटन को नई ऊंचाई दी है। प्रयागराज में संगम क्षेत्र का विकास और महाकुंभ व माघ मेला जैसे बड़े आयोजनों का सफल संचालन इस मॉडल की सफलता को दर्शाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्याचल जैसे छोटे धार्मिक नगरों में भी आधारभूत ढांचे के विकास से स्थानीय व्यापार और सेवाक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Ayodhya Economic Growth: IIM Lucknow Report में ऐतिहासिक उछाल का जिक्र

आईआईएम लखनऊ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में बड़ा उछाल देखा गया। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, परिवहन, निर्माण और सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए। हजारों एमएसएमई सक्रिय हुए और स्थानीय बाजारों में कारोबार कई गुना बढ़ा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आई। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, बेहतर सड़कें और शहर का सौंदर्यीकरण—इन सभी ने अयोध्या को एक सुव्यवस्थित धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

Local Economy Boost: होटल, हस्तशिल्प और MSME सेक्टर को लाभ

धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ने से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी और इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ी। हस्तशिल्प, प्रसाद उद्योग, होटल-गेस्ट हाउस, परिवहन, रेस्तरां, गाइड सेवाएं और छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा हुआ। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की बिक्री बढ़ी है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को मजबूती मिली है। इससे ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिला है।

Faith to Economy Model: आस्था और विकास का समन्वय

यह मॉडल इस विचार पर आधारित है कि आस्था और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। धार्मिक स्थलों का समग्र विकास सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखता है और साथ ही क्षेत्रीय विकास का रास्ता भी खोलता है। आज उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, परिवहन नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी देखी जा रही है। बेहतर कानून-व्यवस्था और सफल आयोजनों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

Urban Development Budget 2026: ₹26,514 करोड़ का प्रावधान

प्रदेश सरकार ने हालिया बजट में नगर विकास के लिए ₹26,514 करोड़ का प्रावधान किया है। यह केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि लंबे समय की आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। काशी-विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र के प्रस्तावित विकास जैसे कदम सांस्कृतिक भूगोल को आर्थिक भूगोल में बदलने की दिशा में हैं। रामपथ, तीर्थ सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार धार्मिक स्थलों को स्थायी आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

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