
लखनऊ। तेजी से विकसित होती अवसंरचना के कारण उत्तर प्रदेश अब वैश्विक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश का पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है। प्रदेश खास तौर पर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के लिए एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में सामने आया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने नॉलेज और सर्विस आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों का एक बड़ा केंद्र बनेगा।
प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में 1000 से अधिक GCC स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके माध्यम से प्रदेश के 5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है। यह पहल उत्तर प्रदेश को उच्च कौशल और हाई-वैल्यू रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के जरिए योगी सरकार ने नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया है। इससे वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता- नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी को दूर किया गया है।
सरकार ने निवेशकों के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया है, जिससे उन्हें शुरुआत से ही नियम, शर्तें और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से समझ में आ सकें। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है। इसका परिणाम यह है कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 90 GCC पहले से संचालित हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे भूमि आधारित प्रोत्साहन निवेश की शुरुआती लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार की सोच है कि यदि निवेशक को शुरुआती चरण में मजबूत संरचनात्मक सहयोग मिलेगा, तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा।
इसी कारण अस्थायी कार्यालय या केवल किराये की व्यवस्था के बजाय स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत और स्थिर बनाने में सहायक माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है, ताकि परियोजनाएं निर्धारित समय के भीतर पूरी हो सकें। इसी वजह से निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश अब एक ऐसा राज्य बनकर उभरा है, जहां योजनाएं केवल घोषित ही नहीं होतीं, बल्कि जमीन पर उतरती भी हैं। निवेशकों को यहां निवेश करना सुरक्षित और लाभकारी लग रहा है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के माध्यम से उत्तर प्रदेश में हाई-वैल्यू रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलने का अवसर मिल रहा है। इससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी और प्रतिभा पलायन (Brain Drain) पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
प्रदेश सरकार विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपने GCC स्थापित करेंगी, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह पहल न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि प्रदेश के भीतर क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने में भी मददगार साबित होगी।
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